देश की खबरें | माकपा के सम्मेलन में फलस्तीन, परिसीमन और जनगणना को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए

मदुरै, चार अप्रैल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राष्ट्रीय सम्मेलन में शुक्रवार को गाजा पर इजराइल के हमले की निंदा करते हुए एक विशेष प्रस्ताव पारित किया। माकपा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर फलस्तीन के संबंध में भारत के लंबे समय से चले आ रहे आधिकारिक रुख को कमजोर करने का आरोप लगाया गया।

माकपा ने कई और प्रस्ताव भी पारित किए, जिसमें ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’, परिसीमन प्रस्तावों और जनगणना में देरी के विरोध में पारित प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा जातिगत जनगणना का समर्थन करते हुए भी एक प्रस्ताव पारित किया गया।

फलस्तीन से संबंधित विशेष प्रस्ताव में गाजा पर इजराइल के "नरसंहार हमले" की निंदा करते हुए तत्काल व स्थायी युद्धविराम की मांग की। माकपा के प्रस्ताव में कहा गया है, "इस बर्बर हमले में 50,021 से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं।"

वामपंथी पार्टी ने केंद्र सरकार की भी आलोचना की और उस पर फलस्तीन के संबंध में भारत के रुख को कमजोर करने का आरोप लगाया।

प्रस्ताव में कहा गया है, "भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने फलस्तीन के संबंध में भारत के लंबे समय से चले आ रहे आधिकारिक रुख को कमजोर कर दिया है। फलस्तीन के लोगों के साथ दृढ़ता से खड़े होने और इजराइल पर कार्रवाई की मांग करने के बजाय, भाजपा सरकार अब इजराइल का पक्ष ले रही है।"

प्रस्ताव में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पहल का भी कड़ा विरोध किया गया और इसे "आरएसएस-भाजपा का अभियान बताया गया।

प्रस्ताव में कहा गया है, "यह उनके 'एक राष्ट्र, एक धर्म, एक , एक संस्कृति, एक नेता' के नारे का विस्तार है। उन्होंने हिटलर के फासीवादी युग से इस नारे को लिया और संशोधित किया है।"

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