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देश की खबरें | बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया के सभी चरणों में राज्य परामर्श को बढ़ावा दें : सीएआरए

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देश की खबरें | बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया के सभी चरणों में राज्य परामर्श को बढ़ावा दें : सीएआरए

नयी दिल्ली, नौ जुलाई बच्चा गोद देने के शीर्ष सरकारी निकाय सीएआरए ने सभी राज्यों से बच्चा गोद लेने वाले भावी माता-पिता, गोद दिए जाने वाले बच्चों और बच्चों के जैविक माता-पिता के लिए अपने मनोसामाजिक समर्थन ढांचे को मजबूत करने के लिए कहा है ताकि भावनात्मक तैयारी और दीर्घकालिक समायोजन सुनिश्चित किया जा सके।

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) ने सभी राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (एसएआरए) को दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के तहत अनिवार्य रूप से बच्चे को गोद देने से पहले, उसके दौरान और बाद में परामर्श सेवाओं को लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।

इस महीने की सात तारीख को जारी एक कार्यालय ज्ञापन में बच्चा गोद लेने वाले भावी माता-पिता, गोद दिये जाने वाले बच्चों तथा अपने बच्चे को गोद देने वाले जैविक माता-पिता के लिए सतत एवं पेशेवर परामर्श सेवाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।

सीएआरए ने कहा कि इन प्रावधानों का उद्देश्य भावनात्मक तैयारी और दीर्घकालिक समायोजन सुनिश्चित करना है।

कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक एसआरएस को निर्देश दिया है कि वे इस उद्देश्य के लिए जिला और राज्य दोनों स्तरों पर योग्य परामर्शदाताओं को नामित करें या समिति में शामिल करें, जिनमें मुख्य रूप से बाल मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य या मानसिक स्वास्थ्य में प्रशिक्षित पेशेवर हों।

शीर्ष संघीय निकाय ने कहा कि गृह अध्ययन रिपोर्ट प्रक्रिया के दौरान बच्चा गोद देने के आकांक्षी भावी माता-पिता को बच्चा गोद लेने पूर्व परामर्श अनिवार्य रूप से प्रदान किया जाना चाहिए, जबकि बड़े बच्चों को गोद देने के चरणों से पहले और उसके दौरान सहायता प्रदान की जानी चाहिए।

कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक विशिष्ट परिस्थितियों में गोद देने के बाद परामर्श की भी आवश्यकता बताई गई है, खासतौर पर जब बच्चे और गोद लेने वाले परिवार के बीच समायोजन नहीं हो पाता है, या किसी भी मामले में जहां व्यवधान या विघटन के संकेत स्पष्ट दिखाई देते हैं तो गोद दिए गए बच्चे अपने मूल का पता लगाने की कोशिश करते हैं।

ज्ञापन के मुताबिक राज्य एजेंसियों से कहा गया कि उस स्थिति में भी परामर्श दिया जाएगा, जिसमें विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियों या जिला बाल संरक्षण इकाइयों द्वारा मूल्यांकन के आधार पर मनोसामाजिक हस्तक्षेप की आवश्यकता हो।

सीएआरए ने राज्य एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गोद देने के लिए अपने बच्चों को सौंपने वाले जैविक माता-पिता को उनके निर्णय के कानूनी पक्ष के बारे में भी परामर्श दिया जाए, जिसमें 60 दिनों के बाद गोद दिये गए बच्चे को वापस नहीं लेने और भविष्य में बच्चे द्वारा अपने जैविक माता पिता की खोज करने के अधिकार के बारे में जानकारी हो।

ज्ञापन में कहा गया कि सभी परामर्श सत्रों और मनोसामाजिक हस्तक्षेपों को विशेष गोद देने वाली एजेंसी और जिला बाल संरक्षण इकाई स्तर पर उचित रूप से रिकॉर्ड और उसका दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 09, 2025 04:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).