देश की खबरें | मध्यप्रदेश में भंडारगृहों से गेहूं, चना और सरसों बाहर निकालने पर रोक, कारोबारी भड़के
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मध्यप्रदेश सरकार ने भंडारगृहों (वेयरहाउस) में गेहूं, चने और सरसों के स्टॉक के दस्तावेज को जांचने का फैसला किया है और जांच पूरी होने तक इस माल को बाहर निकाले जाने से रोकने के लिए व्यापारियों पर अस्थायी रोक लगा दी है।
इंदौर, आठ मई मध्यप्रदेश सरकार ने भंडारगृहों (वेयरहाउस) में गेहूं, चने और सरसों के स्टॉक के दस्तावेज को जांचने का फैसला किया है और जांच पूरी होने तक इस माल को बाहर निकाले जाने से रोकने के लिए व्यापारियों पर अस्थायी रोक लगा दी है।
उधर, दलहन कारोबारियों के एक अग्रणी संगठन ने इस रोक को ‘‘तुगलकी फरमान’’ करार देते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि इसे जल्द वापस लिया जाए।
अफसरों ने बताया कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति व उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से 28 अप्रैल को जारी आदेश में राजस्व महकमे के अनुविभागीय अधिकारियों को भंडारगृहों में गेहूं, चने और सरसों के स्टॉक के दस्तावेज जांचने के लिए अधिकृत किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि जांच पूरी होने तक तीनों जिंसों को भंडारगृहों से बाहर निकाले जाने पर रोक रहेगी। हालांकि, ‘‘बहुत जरूरी होने पर’’ जिलाधिकारी या उसके अधिकृत अफसर की जांच के बाद स्टॉक को बाहर निकाला जा सकेगा।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह रोक किसानों के भंडारित गेहूं, चने और सरसों पर लागू नहीं होगी।
कारोबार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक शासकीय तंत्र को आशंका है कि गेहूं, चने और सरसों की सरकारी खरीद के दौरान कुछ लोग किसानों के रूप में फर्जी पंजीयन कराकर भंडारगृहों में जमा जिंसों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकार को बेचकर अनुचित लाभ कमा सकते हैं।
उधर, ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने भंडारगृहों से गेहूं, चने और सरसों को बाहर निकालने पर सरकारी रोक को ‘‘तुगलकी फरमान’’ बताया और कहा कि इस "अव्यावहारिक कदम" से तीनों जिसों का कारोबार बर्बाद हो जाएगा।
उन्होंने कहा,‘‘इस रोक से दाल कारखानों में कच्चे माल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी जिससे उत्पादन ठप हो जाएगा।’’
अग्रवाल ने मांग की कि प्रदेश सरकार को कारोबारियों और उपभोक्ताओं के हितों में इस रोक को तुरंत वापस लेना चाहिए।
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