देश की खबरें | एल्गार परिषद मामले में पुणे के न्यायाधीश का क्षेत्राधिकार होने के कागजात पेश करिए :उच्च न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार को इस बारे में कागजात या रिकार्ड दिखाने को कहा कि सत्र न्यायाधीश के. डी. वडाने के पास एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में अधिवक्ता सुधा भारद्वाज और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ पुणे पुलिस के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने का क्षेत्राधिकार था।
मुंबई, आठ जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार को इस बारे में कागजात या रिकार्ड दिखाने को कहा कि सत्र न्यायाधीश के. डी. वडाने के पास एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में अधिवक्ता सुधा भारद्वाज और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ पुणे पुलिस के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने का क्षेत्राधिकार था।
न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एन जे जमादार की पीठ ने उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा पेश किये गये रिकार्ड का भारद्वाज के दावों से मिलान हो जाने के बाद यह निर्देश दिया।
दरअसल, भारद्वाज ने दावा किया था कि न्यायाधीश वडाने विशेष न्यायाधीश नहीं हैं।
पीठ ने भारद्वाज के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता युग चौधरी द्वारा किये गये दावे का जिक्र किया।
चौधरी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर जमानत का अनुरोध किया था। इस हफ्ते की शुरूआत में चौधरी ने उच्च न्यायालय से कहा था न्यायाधीश वडाने एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश है। लेकिन उन्होंने एक विशेष न्यायाधीश के तौर पर कार्य किया और भारद्वाज तथा अन्य आठ को 2018 में पुणे पुलिस की हिरासत में सौंप दिया था।
चौधरी ने कहा था कि न्यायाधीश वडाने ने मामले में पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र का भी संज्ञान लिया था जबकि ऐसा अधिकार क्षेत्र में नहीं था।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि वह इस बात की पुष्टि न्यायालय की रजिस्ट्री से करना चाहता है।
पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा कि रजिस्ट्री के रिकार्ड याचिका में दी गई दलील से मेल खा गये हैं। इसके बाद चौधरी ने कहा कि चूंकि भारद्वाज और अन्य को गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपित किया गया है, इसलिए सिर्फ एक निर्धारित विशेष अदालत ही उनके मामले का संज्ञान ले सकता था।
उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह को भारद्वाज के दावों पर जवाब देने का निर्देश दिया है।
भारद्वाज को अगस्त 2018 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें पुणे पुलिस ने सितंबर 2018 में अपनी हिरासत में लिया था। इसके बाद जनवरी, 2020 में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली।
अदालत इस मामले में अब 15 जुलाई को आगे सुनवाई करेगा।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 08, 2021 07:01 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

