देश की खबरें | वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता नामित करने की प्रक्रिया साल में कम से कम एक बार होनी चाहिए : न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि हमेशा ‘सम्मान’ से देखे जाने वाले ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ को नामित करने की प्रक्रिया साल में कम से कम एक बार की जानी चाहिए।
नयी दिल्ली, 12 मई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि हमेशा ‘सम्मान’ से देखे जाने वाले ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ को नामित करने की प्रक्रिया साल में कम से कम एक बार की जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति एस.के. कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने 2017 में एक फैसले में वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ताओं के रूप में नामित करने के लिए शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों के लिए दिशानिर्देशों को दुरुस्त करते हुए कहा पूर्ण न्यायालय द्वारा गुप्त मतदान द्वारा मत देने का नियम नहीं अपितु अपवाद होना चाहिए।
इसमें कहा गया है कि अगर इसका सहारा लेना पड़े तो इसके कारणों को दर्ज किया जाना चाहिए।
पीठ में न्यायमूर्ति ए. अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि विविधता के हित में उचित विचार किया जाना चाहिए, विशेष रूप से लिंग और पहली पीढ़ी के वकीलों के संबंध में, और यह मेधावी अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित करेगा जो यह जानकर क्षेत्र में आएंगे कि उनके लिए शीर्ष पर पहुंचने की गुंजाइश है।
उसने कहा कि कानूनी पेशे को अब “पारिवारिक पेशा” नहीं माना जाता है और नए लोगों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने दिशानिर्देशों में कुछ संशोधनों की मांग करने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया।
इसमें कट-ऑफ अंक, प्रकाशनों के लिए निर्दिष्ट अंक और उम्मीदवारों के व्यक्तिगत साक्षात्कार सहित कई पहलुओं को देखा गया।
पीठ ने कहा कि युवा अधिवक्ताओं को पदनाम के लिए आवेदन करने से नहीं रोका जा सकता है, विशेष रूप से वरिष्ठ अधिवक्ताओं के पदनाम को विनियमित करने के लिए उच्चतम न्यायालय के 2018 के दिशानिर्देश के तहत जिसके अनुसार 10 साल से अधिक के अभ्यास की आवश्यकता नहीं है।
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