नयी दिल्ली, 14 दिसंबर संसद पर आतंकी हमले की बरसी के दिन सुरक्षा में हुई चूक के मुद्दे पर चर्चा कराने की विपक्ष की मांग को लेकर हुए हंगामे के दौरान ‘अमर्यादित आचरण’ करने के लिए वरिष्ठ विपक्षी सदस्य और तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन को बृहस्पतिवार को मौजूदा संसद सत्र की शेष अवधि के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के बाद भी ओब्रायन के सदन में मौजूद रहने के कारण भोजनावकाश के बाद कार्यवाही चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित हुई।
अपराह्न तीन बजे कार्यवाही आरंभ होने पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्होंने सदन के नेता (पीयूष गोयल), विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और सदन में विभिन्न दलों के नेता को अपने कक्ष में बुलाया था लेकिन विपक्ष के नेता और कुछ विपक्षी दलों के नेता नहीं आए।
उन्होंने बताया कि उनकी ओर से संदेश भिजवाया गया कि वे इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।
धनखड़ ने कहा कि उन्होंने ढाई बजे दोबारा विपक्ष के नेता को आमंत्रित किया क्योंकि कक्ष में संवाद का एक स्वस्थ तरीका है जो काफी प्रभावी रहा है और मुद्दों को सुलझाने में भी इससे मदद मिली है।
उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष के नेता ने मुझसे मिलने में असमर्थता जताई है। यह मेरे लिए दुखद मामला है और यह स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुरूप भी नहीं है।’’
इसके बाद धनखड़ ने कहा कि निलंबित सदस्य डेरेक ओब्रायन सदन में मौजूद हैं जो सदन के प्रस्ताव और आसन के निर्देशों की अवहेलना है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह आचरण नियमों का घोर उल्लंघन है और एक सदस्य का इस प्रकार का आचरण करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस वजह से सदन का कामकाज प्रभावित हुआ है। मैं निलंबित सदस्य डेरेक ओब्रयान को एक और मौका देता हूं कि वह सदन से बाहर चले जाएं।’’
यह कहते हुए कि निलंबित सदस्य डेरेक ओब्रायन अब भी निर्देशों की अवज्ञा कर रहे हैं, उन्होंने सदन की कार्यवाही चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले उन्होंने खरगे और गोयल को फिर से अपने कक्ष में बुलाया ताकि गतिरोध दूर किया जा सके।
ढाई बजे जब सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो सभापति धनखड़ ने इस बात पर आपत्ति जताई कि निलंबन का प्रस्ताव पारित होने के बावजूद ओब्रायन सदन में मौजूद हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह प्रस्ताव की अवहेलना कर रहे हैं और आसन की अवमानना कर रहे हैं। उनके आचरण ने सदन को पंगु बना दिया है...लोगों पर सदन की कार्यवाही का बोझ पड़ता है। जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए हम सब बाध्य हैं।’’
धनखड़ ने ओब्रायन से सदन से बाहर जाने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि निलंबित सदस्य सदन से बाहर नहीं गए हैं इसलिए सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित की जाती है।’’
उन्होंने उम्मीद जताई कि जब तीन बजे सदन की कार्यवाही आरंभ होगी तो ओब्रायन आसन के आदेश का पालन करेंगे।
हालांकि तीन बजे सदन की बैठक फिर शुरू होने पर भी डेरेक ओब्रायन सदन में मौजूद थे और सभापति ने बैठक चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले, ओब्रायन के निलंबन के विरोध और संसद की सुरक्षा में चूक पर चर्चा की विपक्ष की मांग के मुद्दे पर हंगामे की वजह से राज्यसभा की कार्यवाही भोजनावकाश के बाद दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।
उच्च सदन की कार्यवाही जब भोजनावकाश के बाद फिर शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में आकर बुधवार को लोकसभा में सुरक्षा में हुई चूक पर बयान देने की मांग करने लगे।
ओब्रायन का नाम लिए बिना सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि निलंबन के बावजूद सदन में उनकी उपस्थिति नियमों की अवहेलना है।
विपक्षी सदस्यों के नारेबाजी जारी रखने पर धनखड़ ने सदन की कार्यवाही दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
उच्च सदन की कार्यवाही भोजनावकाश से पहले भी दो बार स्थगित हुई। इस दौरान, ओब्रायन को ‘अशोभनीय आचरण’ के लिए मौजूदा संसद सत्र की शेष अवधि के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया।
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति जगदीप धनखड़ ने ओब्रायन का नाम लिया और उनके निलंबन की कार्यवाही शुरु की।
सभापति द्वारा जब किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो इसका अर्थ सदस्य के निलंबन की कार्यवाही का आरंभ होना होता है। ऐसा तब होता है जब कोई सदस्य पीठ के प्राधिकार का अनादर कर रहे हों अथवा सभा के कार्य में लगातार और जानबूझकर बाधा डालते हुए सभा के नियमों का दुरुपयोग कर रहे हों।
विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच सदन के नेता पीयूष गोयल ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे धवनि मत से पारित कर दिया गया।
इसके बाद धनखड़ ने घोषणा की, ‘‘डेरेक ओब्रायन इस सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किए जाते हैं।’’
इस घोषणा के बाद विपक्षी सदस्य आसन के निकट आकर ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘डेरेक का निलंबन नहीं सहेंगे’ जैसे नारे लगाने लगे।
हंगामे के बीच ही सभापति ने प्रश्नकाल आरंभ करने की कोशिश की। हालांकि विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी जारी रही। लिहाजा, सभापति ने सदन की कार्यवाही 12 बजकर 05 मिनट पर दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले, उच्च सदन की कार्यवाही आरंभ होने सभापति ने आवश्यक कामकाज निपटाए। इसके तुरंत बाद धनखड़ ने कहा कि संसद परिसर के संरक्षक लोकसभा अध्यक्ष ने 13 दिसंबर को सुरक्षा में हुई चूक की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जांच शुरू कर दी गई है और प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। सुरक्षा का मुद्दा संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसका प्रभावी तरीके से समाधान किया जा रहा है।’’
सभापति ने बताया कि नियम 267 के तहत उन्हें 28 नोटिस प्राप्त हुए हैं लेकिन यह स्वीकार किए जाने लायक नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने शून्य काल आरंभ कराया।
इसी दौरान कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा कर रहे कुछ सदस्य आसन के निकट आ गए और नारेबाजी करने लगे।
विपक्षी सदस्य ‘गृह मंत्री सदन में आओ, सदन में आकर जवाब दो’ जैसे नारे लगा रहे थे।
विपक्षी सदस्यों के आचरण पर आपत्ति जताते हुए सभापति ने उनसे आसन के निकट नहीं आने का बार-बार आग्रह किया।
इसी समय ओब्रायन आसन के सामने आ गए और कुछ कहने का प्रयास किया।
इससे, अप्रसन्न धनखड़ ने ओब्रायन का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें सदन से बाहर चले जाने को कहा।
धनखड़ ने ओब्रायन के आचरण को आसन की 'अवज्ञा' और 'गंभीर कदाचार' करार दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर सदस्य अपनी सीट पर वापस नहीं जाते हैं तो मुझे कड़ी कार्रवाई करनी होगी... मैंने संकेत दिया है कि हम नियमों का उल्लंघन करके, प्रक्रिया का पालन नहीं करके या निर्देशों का पालन नहीं करके अपने आचरण का उदाहरण नहीं दे सकते हैं। यह गंभीर मामला है।’’
विपक्षी सदस्यों द्वारा अपनी सीट पर वापस जाने से इनकार करने पर धनखड़ ने कहा, ‘‘यह गंभीर अवज्ञा है... जो सदस्य आसन के निकट आए हैं, उन्हें तुरंत अपना स्थान ग्रहण कर लेना चाहिए। मैं आगाह कर रहा हूं।’’
उन्होंने सदन के बीचोंबीच अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे ओब्रायन के साथ बहस करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘डेरेक ओब्रायन कहते हैं कि वह अपनी सीट पर नहीं जाएंगे। डेरेक ओब्रायन का कहना है कि वह आसन की अवहेलना करेंगे। डेरेक ओब्रायन कहते हैं कि मैं नियमों का सम्मान नहीं करूंगा।’’
धनखड़ ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस नेता ‘ड्रामेबाजी’ कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक गंभीर अशोभनीय आचरण है।’’
विपक्ष के लगातार नारेबाजी करने पर उन्होंने कहा, ‘‘यह शर्मनाक है।’’
धनखड़ ने आगे कहा कि यह आचरण दिखाता है कि ‘‘हम चिल्लाने वाली ब्रिगेड से ज्यादा नहीं हैं ... हम बहस, संवाद, चर्चा, विचार-विमर्श में विश्वास नहीं करते हैं। हम केवल अशांति में विश्वास करते हैं।’’
ओब्रायन इसके बाद आसन के निकट चले गए।
धनखड़ ने कहा, ‘‘मैं डेरेक ओब्रायन का नाम लेता हूं। डेरेक ओब्रायन को तुरंत सदन छोड़ने के लिए नामित किया जाता है।’’
इसके बाद सभापति ने 11 बजकर 22 मिनट पर कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
संसद की सुरक्षा में चूक की बड़ी घटना बुधवार को उस वक्त सामने आई जब लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा से दो लोग सदन के भीतर कूद गए, नारेबाजी करने लगे और ‘केन’ के जरिये पीले रंग का धुआं फैला दिया। घटना के तत्काल बाद दोनों को पकड़ लिया गया।
ब्रजेन्द्र
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