देश की खबरें | यासीन मलिक के न्यायालय में पेश होने के बाद जांच के आदेश
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक के उच्चतम न्यायालय में पेश होने को लेकर आलोचना झेल रहे दिल्ली कारागार विभाग ने शुक्रवार को कहा कि यह ‘‘पहली नजर में कुछ अधिकारियों की लापरवाही’’ का मामला लगता है और इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं।
नयी दिल्ली, 21 जुलाई तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक के उच्चतम न्यायालय में पेश होने को लेकर आलोचना झेल रहे दिल्ली कारागार विभाग ने शुक्रवार को कहा कि यह ‘‘पहली नजर में कुछ अधिकारियों की लापरवाही’’ का मामला लगता है और इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं।
आधिकारिक बयान के अनुसार, उपमहानिरीक्षक (कारागार-मुख्यालय) राजीव सिंह लापरवाही का पता लगाने और गलती करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए जांच करेंगे और तीन दिन के भीतर महानिदेशक (कारागार) को रिपोर्ट सौंपेंगे।
तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे मलिक के शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में पेश होने से सनसनी मच गयी।
आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल में बंद मलिक को अदालत के आदेश के बगैर सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में जेल के वाहन में उच्च सुरक्षा वाले उच्चतम न्यायालय के परिसर में लाया गया। मलिक के अदालत कक्ष में कदम रखते ही वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए।
मलिक की मौजूदगी पर आश्चर्य जताते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ से कहा कि उच्च जोखिम वाले दोषियों को अपने मामले की व्यक्तिगत तौर पर पैरवी करने के लिए अदालत कक्ष में आने की मंजूरी देने की एक प्रक्रिया है।
मेहता ने जब मलिक की अदालत कक्ष में मौजूदगी की ओर इंगित किया तो पीठ ने कहा कि उसने मलिक को कोई अनुमति नहीं दी या व्यक्तिगत तौर पर अपने मामले की जिरह की अनुमति देने वाला कोई आदेश परित नहीं किया।
मेहता ने केन्द्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को ‘‘सुरक्षा में गंभीर चूक’’ के इस मामले पर पत्र लिखा है।
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