देश की खबरें | अंतरिक्ष के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी एक बड़ा सुधार: इसरो प्रमुख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इसरो प्रमुख के. सिवन ने बृहस्पतिवार को कहा कि निजी क्षेत्र को अब रॉकेट एवं उपग्रह बनाने और प्रक्षेपण सेवाएं मुहैया कराने जैसी अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देना एक बड़ा सुधार है ।
नयी दिल्ली, 25 जून इसरो प्रमुख के. सिवन ने बृहस्पतिवार को कहा कि निजी क्षेत्र को अब रॉकेट एवं उपग्रह बनाने और प्रक्षेपण सेवाएं मुहैया कराने जैसी अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देना एक बड़ा सुधार है ।
कैबिनेट ने ग्रह अन्वेषण मिशन समेत अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बुधवार को अनुमति दी।
यह भी पढ़े | बिहार में आकाशीय बिजली ने मचाया कोहराम, आज 83 लोगों की मौत- पीएम मोदी ने जताया दुख.
सिवन ने इसे ‘‘बड़ा सुधार’’ करार देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतरग्रहीय मिशन का भी हिस्सा बन सकता है।
सिवन ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘निजी क्षेत्र रॉकेट, उपग्रह बनाने और वाणिज्यिक आधार पर प्रक्षेपण सेवाएं मुहैया कराने जैसी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए सक्षम होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘निजी क्षेत्र इसरो के अंतरग्रहीय मिशनों का हिस्सा हो सकता है। अवसरों की घोषणा के जरिए ऐसा करने की योजना बनाई जा रही है।’’
हालांकि सिवन ने कहा कि इसरो की गतिविधियां कम नहीं होंगी और वह उन्नत शोध एवं विकास, अंतरग्रहीय और मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों समेत अंतरिक्ष आधारित गतिविधियां जारी रखेगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या निजी क्षेत्र की विदेशी कंपनी को भी अनुमति दी जाएगी तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में अभी निर्णय लिया जाना बाकी है।
पश्चिम के कई देशों में उपग्रह के प्रक्षेपण समेत असैन्य अंतरिक्ष गतिविधियां निजी क्षेत्र के लिए खुली थीं लेकिन उसके विपरीत भारत में यह बंद था। लेकिन इस फैसले से उसमें परिवर्तन की संभावना है।
उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र में अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देने और उनके नियमन के संबंध में स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए अंतरिक्ष विभाग के तहत भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण (इन-स्पेस) केंद्र का गठन किया गया है।
सिवन ने कहा कि इससे न केवल अंतरिक्ष क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी, बल्कि भारतीय उद्योग को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने के लिए सहायता मिलेगी।
फिलहाल वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 360 अरब डालर की है जबकि भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था सात अरब डॉलर की है।
सिवन ने कहा, ‘‘अंतरिक्ष विभाग में यह बड़ी व्यवस्था और बड़ा सुधार होने जा रहा है। तकनीकी, कानूनी सुरक्षा, गतिविधि संवर्धन के साथ-साथ निगरानी के लिए इन-स्पेस के अपने निदेशालय होंगे, ताकि वे स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें।’’
इन-स्पेस मंडल में सरकारी सदस्यों के अलावा उद्योग एवं शिक्षा जगत के सदस्य शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि इस प्रणाली को आकार लेने में छह माह का समय लगेगा, लेकिन निजी कंपनियां अंतरिम समय में अंतरिक्ष विभाग को अपने आवेदन दे सकती हैं।
सिवन ने कहा, ‘‘निजी कंपनियां इन-स्पेस को सीधे आवदेन भेज सकती हैं, जो आवेदन का स्वतंत्र रूप से आकलन करेगा। इन स्पेस द्वारा निर्णय देने के बाद यह सभी पक्षकारों , चाहे वह निजी लोग हों या इसरो, उनके लिए बाध्यकारी होगा।’’
उन्होंने कहा कि नयी नौवहन नीति का भी प्रस्ताव लाया जा रहा है तथा दूर संवेदी डाटा नीति में बदलाव एवं सैटकॉम नीति भी आने ही वाली है। इन बदलावों का लक्ष्य खुली एवं समावेशी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए इननीतियों को अनुकूल बनाना है।
उन्होंने कहा, ‘‘अंतरिक्ष विभाग के तहत सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनसिल) अंतरिक्ष गतिविधियों को ‘आपूर्ति संचालित मॉडल’ से ‘मांग संचालित’ मॉडल में बदलकर इस प्रयास में अहम भूमिका निभाएगा, जिससे अंतरिक्ष संपदा का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)