देश की खबरें | प्रधानमंत्री सदन में आएं, मणिपुर के मुद्दे पर समग्र चर्चा हो: विपक्ष

नयी दिल्ली, 31 जुलाई विपक्षी दलों ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर संसद के दोनों सदनों के अपमान का आरोप लगाया तथा कहा कि मणिपुर के मुद्दे पर समग्र चर्चा होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को सदन के भीतर वक्तव्य देना चाहिए।

विपक्षी नेता लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर जल्द चर्चा की मांग कर रहे हैं। वे राज्यसभा में नियम 267 के तहत मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं।

राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि संसद में मणिपुर के विषय पर समग्र और विस्तृत चर्चा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए क्योंकि मणिपुर के मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकार किया है कि दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने की घटना जैसी कई घटनाएं हुई हैं।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्रधानमंत्री संविधान के अनुच्छेद 75 के तहत संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं। उन्हें संसद के भीतर आकर बोलना चाहिए।’’

तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का सदन में मणिपुर पर बयान नहीं देना सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा का अपमान नहीं है, बल्कि देश के 130 करोड़ लोगों का अपमान है।

कांग्रेस नेता का कहना था, ‘‘याद करिये कि एक द्रौपदी (के चीरहरण) को लेकर महाभारत हुआ था,लेकिन यहां तो कई द्रौपदियों के साथ ऐसा हो रहा है।’’

तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा कि प्रधानमंत्री संसद के मानसून सत्र में अब तक 20 सेकेंड के लिए भी सदन में नहीं आए हैं।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘प्रधानमंत्री सदन में क्यों नहीं आ सकते?’’

डेरेक ने कहा, ‘‘हम सभी मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार हैं।’’

कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) के अन्य घटक दल मानसून सत्र के पहले दिन से ही मणिपुर में जातीय हिंसा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद में वक्तव्य देने और चर्चा कराए जाने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर हंगामे के कारण दोनों सदनों में कार्यवाही बाधित रही है।

कांग्रेस ने मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर संसद में जारी गतिरोध के बीच बुधवार, 26 जुलाई को लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर सदन में चर्चा के लिए मंजूरी दे दी गई थी। उस दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा था कि वह सभी दलों के नेताओं से बातचीत करने के बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तिथि तय करेंगे।

हक

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