देश की खबरें | प्रधानमंत्री मोदी सवालों का जवाब देने में विफल रहे: विपक्ष

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लोकसभा में मंगलवार को कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला ‘‘पूरी तरह से खुफिया और सुरक्षा विफलता’’ का नतीजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सवालों से बच रही है और सच्चाई छिपा रही है।

नयी दिल्ली, 29 जुलाई लोकसभा में मंगलवार को कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला ‘‘पूरी तरह से खुफिया और सुरक्षा विफलता’’ का नतीजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सवालों से बच रही है और सच्चाई छिपा रही है।

पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर सदन में चर्चा के दौरान सरकार को घेरने की कोशिश करते हुए कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों ने दावा किया कि नरेन्द्र मोदी-नीत सरकार की विदेश नीति ‘विफल’ रही है, क्योंकि जी-20 और ब्रिक्स सहित किसी भी बड़े समूह ने इस घटना के बाद पाकिस्तान की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित नहीं किया।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी के संसद में दिए जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें एक भी जवाब नहीं मिला।

खेड़ा ने पीटीआई की वीडियो सेवा से कहा, “हम चर्चा की मांग कर रहे थे क्योंकि हम और देश दोनों ही जवाब चाहते थे। हमें एक भी जवाब नहीं मिला।”

उन्होंने कहा, “हम यह उम्मीद नहीं करते कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री ललिता पवार (अभिनेत्री) की तरह खड़े होकर विपक्ष को कोसेंगे।”

खेड़ा ने कहा, “सीधा सवाल यह है कि पहलगाम हमला कैसे हुआ, आतंकवादी भारत में कैसे घुस आए और हमारे नागरिकों, हमारे पर्यटकों पर हमला कैसे किया। कोई जवाब नहीं मिला।”

उन्होंने कहा, “फिर आप कहते हैं कि आपने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, 30 मिनट के अंदर आपने पाकिस्तान को फोन करके बता दिया, अब और हमले नहीं, आप भी हमला नहीं करते। यह कैसी व्यवस्था थी?”

खेड़ा ने कहा, “संघर्षविराम की घोषणा अमेरिका की ओर से क्यों हुई? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हमें नहीं मिला।” उन्होंने कहा, “आप एक भी देश का समर्थन पाने में नाकाम क्यों रहे? एक भी देश ने पाकिस्तान की निंदा नहीं की।”

कांग्रेस नेता ने कहा, “उनमें (प्रधानमंत्री मोदी में) चीन का नाम लेने की भी हिम्मत नहीं थी।”

इससे पहले, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोदी सरकार से पहले ही भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम की घोषणा कर दी, जो ‘तीसरे पक्ष का स्पष्ट हस्तक्षेप’ है।

अलप्पुझा (केरल) के सांसद ने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के भाषण की आलोचना करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री ने सभी मुद्दों पर बात की, लेकिन ‘सुरक्षा विफलता’ के बारे में नहीं।

वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार ने दावा किया कि कश्मीर जाना सुरक्षित है, लेकिन क्या पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य नहीं है? उन्होंने आगे कहा कि जब आतंकवादियों ने पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या की थी, तब कोई सुरक्षा घेरा नहीं था।

चर्चा में भाग लेते हुए, द्रमुक के ए. राजा ने कहा कि सरकार को हर चीज के लिए जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी को दोष नहीं देना चाहिए।

राजा ने कहा कि जी7, जी20 और ब्रिक्स जैसे बड़े समूहों में से किसी ने भी पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान की निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित नहीं किया।

उन्होंने जानमाल के नुकसान के लिए ‘पूरी तरह से खुफिया विफलता और प्रशासन की अक्षमता’ को जिम्मेदार ठहराया।

आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा कि कई सवाल अनुत्तरित हैं, जैसे कि आतंकवादी पर्यटन स्थल तक कैसे पहुंच गए।

जम्मू कश्मीर के बारामूला से निर्दलीय सांसद शेख अब्दुल रशीद ने कहा कि पहलगाम हमला मानवता पर एक कलंक है।

उन्होंने कहा कि सरकार का यह दावा कि घाटी में सब कुछ सामान्य है, केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम लाशें ढोते-ढोते थक गए हैं।’’

रशीद ने पूछा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश दुनिया में देने के लिए विभिन्न देशों में भेजे गए सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल में कश्मीर के कितने सदस्य थे।

वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने चीन को ‘‘राक्षस’’ करार देते हुए कहा कि भारत को इस पड़ोसी देश से उतना ही खतरा है जितना कि आतंकवाद से है और वह ‘‘हमारी जमीन एवं बाजार’’, दोनों छीन लेगा।

उन्होंने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा के दौरान कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि अब भविष्य में कोई आतंकी घटना नहीं होगी।

सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘लोग सरकार की ओर से दिये गए आश्वासन पर वहां (पहलगाम) गये थे। लेकिन सूरक्षा में हुई चूक की जिम्मेदारी कौन लेगा? इसके लिए जिम्मेदार कौन है? यह सबसे बड़ा सवाल है।’’

उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले को ‘‘खुफिया तंत्र की नाकामी’’ करार देते हुए सरकार से यह बताने की मांग की कि वह भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है।

अखिलेश ने उल्लेख किया कि पहलगाम से पहले पुलवामा (2019) में भी ऐसा ही हुआ था और उस समय भी खुफिया तंत्र की नाकामी की बात कही गई थी।

सपा सांसद ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा वाले दिन ही कश्मीर में ‘ऑपरेशन महादेव’ संचालित होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुठभेड़ कल (सोमवार को) ही क्यों हुई?

उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी ‘‘आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक नीतियों के लिए ‘एसआईआर’ (विशेष गहन पुनरीक्षण) जरूर करवाना चाहिए’’ क्योंकि वह हर बार यह कहकर नहीं बच सकती कि ‘‘चूक’’ हुई है।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर (सरकार की ओर से) जो प्रचार किया गया, वह निंदनीय है।

अखिलेश ने कहा, ‘‘हमारा खतरा पाकिस्तान से नहीं है, बल्कि चीन से है। वह न केवल हमारी जमीन छीन रहा है, बल्कि बाजार भी छीन रहा है।’’ उन्होंने सवाल किया कि देश का क्षेत्रफल 2014 में कितना था और आज कितना है?

सपा सांसद ने कहा कि सरकार को आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए वहां (चीन) से कारोबार कम करने पर फैसला करना चाहिए।

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