विदेश की खबरें | पोलैंड और तीन बाल्टिक देशों के राष्ट्रपति यूक्रेन पहुंचे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. डूडा के कर्मचारी पावेल सजरोत ने बुधवार को कहा कि पोलैंड के राष्ट्रपति लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया के राष्ट्रपति के साथ अभी यूक्रेन में हैं। वे राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मिलने के लिए कीव की यात्रा कर रहे हैं।’’

डूडा के कर्मचारी पावेल सजरोत ने बुधवार को कहा कि पोलैंड के राष्ट्रपति लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया के राष्ट्रपति के साथ अभी यूक्रेन में हैं। वे राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मिलने के लिए कीव की यात्रा कर रहे हैं।’’

सुरक्षा कारणों को लेकर उन्होंने कोई ब्योरा नहीं दिया।

पावेल ने कहा कि डूडा प्रतीकात्मक समर्थन, राजनीतिक समर्थन और राहत सामग्री पर वार्ता करने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि ये चारों देश यूक्रेन को मानवीय सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इन सभी देशों की सीमाएं रूस से लगी हुई हैं और वे यूक्रेन को हथियार मुहैया कर रहे हैं,जिन्हें वे ‘रक्षात्मक’ बता रहे हैं।

चारों राष्ट्रपति के एक ट्रेन पर सवार होने और यात्रा के दौरान एक मेज के चारों ओर बैठे होने की तस्वीरें उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की गई हैं।

एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कैरिस ने एक ट्विटर पोस्ट में कहा, ‘‘हम यूक्रेन के लोगों के प्रति मजबूत समर्थन प्रदर्शित करने के लिए यहां की यात्रा कर रहे हैं। हम प्रिय मित्र राष्ट्रपति (वोलोदिमीर) जेलेंस्की से मिलेंगे।’’

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मास्को : रूस ने कहा है कि 1,000 से अधिक यूक्रेनी सैनिकों ने दक्षिणी शहर मारियोपोल में आत्मसमर्पण कर दिया है।

रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल इगोर कोनाशेनकोव ने कहा कि यूक्रेन के 36वें मरीन ब्रिगेड के 1026 सैनिकों ने शहर में आत्मसमर्पण कर दिया।

यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार ओलेकसीव अरेस्तोवयच ने इस सामूहिक आत्मसर्मण पर कुछ नहीं कहा। हालांकि, उन्होंने ट्विटर पर कहा कि 36वें मरीन ब्रिगेड के सैनिक शहर में अन्य यूक्रेनी बलों से जुड़ने में कामयाब रहें।

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रोम : पोप फ्रांसिस ने याद दिलाया कि उन्होंने 2013 में कहा था कि तीसरे विश्व युद्ध का खतरा कहीं अधिक वास्तविक रूप में दुनिया पर मंडरा रहा है।

पोप ने लोगों की याददाश्त कमजोर रहने का जिक्र करते हुए यह भी कहा, ‘‘यदि हमारी याददाश्त अच्छी रहती तो हम उस बात को याद रखते जो हमारे दादा-दादी और माता-पिता ने हमसे कही थी तथा हम अपने फेफड़ों को पड़ने वाली ऑक्सीजन की जरूरत की तरह शांति की जरूरत को भी समझते।

फ्रांसिस ने युद्ध को एक कैंसर की तरह बताया जो अपनी चपेट में पूरे शरीर को ले लेता है।

उन्होंने कहा कि महिलाएं, बच्चे और बुर्जुग बम से बचने के लिए बंकर में छिपने के लिए मजबूर हैं।

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