देश की खबरें | राष्ट्रपति मुर्मू ने किया महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय का भ्रमण
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रायपुर, 31 अगस्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यहां महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय का भ्रमण किया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति बृहस्पतिवार दोपहर बाद रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय पहुंचीं जहां छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने उनका स्वागत किया।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति मुर्मू संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक वैभव से रूबरू हुईं और यहां की ऐतिहासिक पृष्टभूमि से जुड़ी पुरातन और संग्रहणीय वस्तुओं का अवलोकन किया।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ और अन्य क्षेत्रों से प्राप्त प्रागैतिहासिक पत्थर के औजारों, प्राचीन मूर्तियों, अभिलेखों, ताम्रपत्रों और सिक्कों का अवलोकन किया तथा संग्रहालय में रखी गई आदिवासी संस्कृति और आधुनिक शिल्प से संबंधित सामग्रियों के बारे में भी जानकारी ली।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने संग्रहालय के ‘रिजर्व कलेक्शन’ में रखी प्रतिमाओं का भी अवलोकन किया।
अधिकारियों ने बताया कि सिरपुर में 1954-55 में खुदाई के दौरान तथा अन्य समय में प्राप्त धातु प्रतिमाओं तथा अन्य प्रतिमाओं को ‘रिजर्व कलेक्शन’ में रखा गया है जो विश्व की अनुपम कृतियों में से एक हैं, इसलिए सुरक्षा के लिए इसे बाहर नहीं रखा जाता है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने आज ‘रिजर्व कलेक्शन’ की जिन प्रतिमाओं का अवलोकन किया उनमें मंजूश्री, भगवान बुद्ध की वरद मुद्रा और भूमिस्पर्श मुद्रा में प्रतिमाएं तथा वज्रपाणी की प्रतिमा शामिल हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद थे।
राज्य की राजधानी रायपुर के सिविल लाइंस में क्षेत्र में स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय एक पुरातात्विक संग्रहालय है। इसे 1875 में राजनांदगांव के राजा महंत घासीदास ने बनवाया था।
अधिकारियों ने बताया कि रायपुर संग्रहालय शुरू में नगर पालिका और जिला परिषद द्वारा चलाया जाता था। यह संग्रहालय सबसे पहले एक अष्टकोणीय भवन में स्थापित किया गया था। 1945 के बाद इस संग्रहालय के संरक्षण और विकास के लिए विशेष प्रयास किए गए।
उन्होंने बताया कि अपने पूर्वजों की परंपरा को अपनाते हुए राजनांदगांव की रानी ज्योति देवी और उनके बेटे राजा दिग्विजय दास ने एक नया संग्रहालय भवन बनाने के लिए एक लाख रुपये का भुगतान किया था। वर्तमान संग्रहालय भवन के निर्माण के बाद 21 मार्च 1953 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने संग्रहालय भवन का उद्घाटन किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में अपनी प्राचीनता और पुरातन के लिए प्रसिद्ध है। इस संग्रहालय में छत्तीसगढ़ और अन्य क्षेत्रों से प्राप्त प्रागैतिहासिक पत्थर के औजार, प्राचीन मूर्तियाँ, अभिलेख, ताम्रपत्र और सिक्के के अलावा आदिवासी संस्कृति, पशु-पक्षियों और आधुनिक काल के शिल्प कार्यों से संबंधित विभिन्न प्रकार की सामग्रियां हैं।
उन्होंने बताया कि संग्रहालय के आधार में प्रवेश दीर्घा, सिरपुर दीर्घा और शिलालेख दीर्घा हैं। पहली मंजिल में प्रकृति गैलरी, शस्त्र गैलरी, पेंटिंग गैलरी और दूसरी मंजिल में आदिवासी संस्कृति गैलरी है।
अधिकारियों ने बताया कि संग्रहालय में पत्थर की मूर्तियाँ, धातु की मूर्तियां, तांबे की चादरें, अभिलेख, सिक्के और आधुनिक काल की विभिन्न मूर्तियां हैं। दुर्लभ पुरावशेषों में ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी के अभिलेखित लकड़ी के स्तंभ, सिरपुर के किरारी और मंजुश्री तथा अन्य कांस्य प्रतिमाएं हैं।
राष्ट्रपति दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। राष्ट्रपति ने प्रवास के पहले दिन रायपुर के जगन्नाथ मंदिर में दर्शन किया तथा ब्रम्हाकुमारी संस्थान में 'सकारात्मक परिवर्तन का वर्ष' कार्यक्रम की शुरुआत की।
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