देश की खबरें | प्रसव पूर्व निदान संबंधी आयु प्रतिबंध का मामला: जवाब के लिए केंद्र को चार हफ्ते का समय मिला
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने गर्भधारण से पहले और प्रसव-पूर्व निदान के लिए महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर 35 वर्ष की आयु के प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र को जवाब देने के लिए सोमवार को चार हफ्ते का समय दिया।
नयी दिल्ली, 16 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने गर्भधारण से पहले और प्रसव-पूर्व निदान के लिए महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर 35 वर्ष की आयु के प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र को जवाब देने के लिए सोमवार को चार हफ्ते का समय दिया।
न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति ए एस ओका की पीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया।
केंद्र की ओर से पेश वकील ने पिछले साल 17 अक्टूबर को जारी नोटिस के संबंध में जवाब देने के लिए कुछ और वक्त की मोहलत देने का अनुरोध किया।
पीठ ने कहा, ‘‘प्रतिवादी के वकील ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए वक्त मांगा है...चार सप्ताह के भीतर जवाब दिया जाए।’’
शीर्ष अदालत ने वकील मीरा कौर पटेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के लिए आठ हफ्ते बाद की तारीख तय की है।
न्यायालय ने 17 अक्टूबर 2022 के अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम, 1994 की धारा 4 (3) (i) का हवाला देती है कि 35 वर्ष की आयु का प्रतिबंध शीर्ष अदालत के हालिया फैसले के मद्देनजर महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर प्रतिबंध है।
अधिनियम के अनुसार, जब तक गर्भवती महिला की आयु 35 वर्ष से अधिक न हो, प्रसव-पूर्व निदान तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर एक महत्वपूर्ण फैसले में, शीर्ष अदालत ने पूर्व में कहा था कि सभी महिलाएं गर्भावस्था के 24 सप्ताह तक सुरक्षित और कानूनन गर्भपात कराने की हकदार हैं, और उनकी वैवाहिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव ‘‘संवैधानिक रूप से टिकाऊ नहीं’’ है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)