देश की खबरें | महिला आरोपियों के पक्ष में लैंगिक आधार पर पूर्वधारणा न्याय प्रणाली के सिद्धांत के खिलाफ : दिल्ली उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महिला आरोपियों के पक्ष में लैंगिक पूर्वधारणा ‘आपराधिक न्याय प्रणाली’ के सिद्धांतों के विरूद्ध होने का उल्लेख करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया और नये सिरे से आरोपित करने का आदेश जारी करने के लिए विषय को वापस उसके पास भेज दिया।

नयी दिल्ली, छह सितंबर महिला आरोपियों के पक्ष में लैंगिक पूर्वधारणा ‘आपराधिक न्याय प्रणाली’ के सिद्धांतों के विरूद्ध होने का उल्लेख करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया और नये सिरे से आरोपित करने का आदेश जारी करने के लिए विषय को वापस उसके पास भेज दिया।

उच्च न्यायालय ने कहा कि भारतीय कानून प्रणाली लैंगिक तटस्थता के सिद्धांत पर आधारित है जहां प्रत्येक व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी लिंग का हो, उसके कृत्यों के लिए कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाता है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत ने इस पूर्वधारणा पर महिला आरोपी को आरोपमुक्त कर एक बड़ी त्रुटि की कि जब पुरुष आरोपी पहले से शिकायतकर्ता की पिटाई कर रहे थे तब उनके (महिलाओं के) लिए पुरुषों को उकसाने की या कथित पीड़ित को पीटने में शामिल होने की कोई गुंजाइश ही नहीं बनती।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा, ‘‘यह अदालत यह उल्लेख करने के लिए बाध्य है कि निचली अदालत द्वारा 'पुरुष आरोपियों' और 'महिला आरोपियों' के बीच ऐसा भेदभाव किया गया था। किसी महिला आरोपी के पक्ष में ऐसी धारणा, जिसमें कोई ठोस आधार या वैध आधार न हो, हमारी न्याय प्रणाली के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, जो पूर्वकल्पित धारणाओं के बजाय तथ्यों के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन पर आधारित है।''

उच्च न्यायालय ने कहा कि लैंगिक आधार पर पूर्वधारणा की भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में कोई जगह नहीं है, जब तक कि यह कानून सम्मत न हो। आपराधिक कृत्य में शामिल प्रत्येक व्यक्ति का अलग-अलग मूल्यांकन करने की जरूरत है, जो रिकॉर्ड में दर्ज किये गये बयानों और अभियोजन द्वारा एकत्र साक्ष्य पर आधारित हो तथा अदालत के विचारार्थ रखे गये हों।

उच्च न्यायालय दिल्ली पुलिस की एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसने अपहरण और हत्या की कोशिश के मामले में आरोपी चार महिलाओं को आरोपमुक्त करने संबंधी निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है।

इन आरोपियों को इस आधार पर आरोपमुक्त किया गया था कि मामले में हथियारबंद पुरुषों को उनके द्वारा उकसाने के लिए कोई साक्ष्य नहीं है।

निचली अदालत ने मामले में पांच पुरूषों के खिलाफ आरोप तय किये थे।

उच्च न्यायालय ने कहा कि पूर्वधारणा के आधार पर महिला आरोपियों को आरोपमुक्त करने की अनुमति आरोप तय करने के स्तर पर नहीं दी जा सकती।

उच्च न्यायालय ने महिला आरोपियों के बारे में निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया और नये सिरे से आरोपित करने का आदेश जारी करने के लिए विषय को वापस निचली अदालत के पास भेज दिया।

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