नयी दिल्ली, चार अगस्त संसद की एक समिति ने शुक्रवार को कहा कि मानसिक स्वास्थ्य विकारों की व्यापकता और गंभीरता तथा लोगों पर महामारी के प्रभाव का आकलन करने के लिए कोविड के बाद का मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण महत्वपूर्ण है।
विभाग से संबंधित स्वास्थ्य पर संसद की स्थायी समिति ने संसद के दोनों सदनों में पेश अपनी 148वीं रिपोर्ट में कहा कि यह सर्वेक्षण ऐसे जनसांख्यिकीय समूहों और क्षेत्रों के बारे में मूल्यवान जानकारी मुहैया कराएगा जिनका मानसिक स्वास्थ्य महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण -2 में तेजी लाई जाए ताकि लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड के प्रभाव का सटीक पता लगाया जा सके। यह सर्वेक्षण 2025 में पूरा किया जाना है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि महामारी ने मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक-सामाजिक कल्याण के लिए जोखिम बढ़ा दिया है और सभी के लिए तनाव के कारकों को बढ़ा दिया है, विशेष रूप से बच्चों, किशोरों और देखभाल करने वालों के लिए समस्या पैदा कर दी है।
समिति ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान, बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों ने दुख, अनिश्चितता और अलगाव का अनुभव किया, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक-सामाजिक कल्याण प्रभावित हुआ।
इसमें कहा गया है, ''भारत में मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड महामारी के विनाशकारी प्रभाव को देखते हुए तत्काल और व्यापक देशव्यापी मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण की आवश्यकता है।"
समिति ने कहा कि सर्वेक्षण के निष्कर्ष नीति निर्माताओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य वित्त पोषण, बुनियादी ढांचे के विकास और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप से संबंधित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण तथ्यों के रूप में काम करेंगे।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY