देश की खबरें | गरीबों का धन मोदी के मित्रों को भेजा जा रहा, प्रधानमंत्री वास्तविकता का सामना नहीं कर पा रहे: राहुल

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नयी दिल्ली, एक सितंबर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बढ़ती महंगाई को लेकर बुधवार को सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि किसानों, छोटे कारोबारियों और वेतनभोगी वर्ग से धन लिया जा रहा है और गरीबों का धन ‘‘प्रधानमंत्री के कुछ’’ पूंजीपति ‘‘मित्रों’’ को दिया जा रहा है।

गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि अर्थव्यवस्था ‘‘विनाशकारी रूप से विफल’’ हो गई है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की वास्तविकता का सामना नहीं कर पा रहे और घबराए हुए हैं।

उन्होंने कहा कि देश को एक नए नजरिए की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘‘ (अर्थव्यवस्था के मामले में) यह विनाशकारी विफलता है और इसका लक्षण जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का ढहना है।’’

गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री को घबराया हुआ और भारत में ‘‘आर्थिक एवं नेतृत्व के संकट’’ को देखकर चीन भी अपनी योजना बना रहा है कि वह इस स्थिति का कैसे लाभ उठा सकता है।

उन्होंने रसोई गैस, डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि पिछले सात साल में इन उत्पादों के दाम बढ़ाकर 23 लाख करोड़ रुपए अर्जित किए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि यह धन कहां खर्च किया गया है?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘दिलचस्प बात यह है कि एक ओर किसानों, श्रमिकों, छोटे कारोबारियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, संविदा कर्मियों, वेतनभोगी वर्ग और ईमानदार उद्योगपतियों से धन लिया जा रहा है और दूसरी ओर (कुछ लोगों को) धन दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन या पांच मित्रों को लाभ दिया जा रहा है। गरीबों एवं कमजोर वर्ग का धन प्रधानमंत्री के मित्रों को दिया जा रहा है।’’

गांधी ने कहा, ‘‘यह संरचनात्मक असफलता है और सरकार घबराई हुई है। सरकार और नरेंद्र मोदी डरे हुए हैं क्योंकि वह लोगों से किए वादों को पूरा नहीं कर पाए हैं। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री दोनों घबराए हुए हैं और उन्हें नहीं पता कि ऐसे में क्या करना है। यह असलियत है।’’

गांधी ने देश के युवाओं से कहा कि वे इस बारे में सोचें, क्योंकि यह उनके भविष्य का सवाल है और उन्हें सवाल करना चाहिए कि यह 23 लाख करोड़ रुपए कहां खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गैस, पेट्रोल और डीजल पर कर लगाकर किसानों, श्रमिकों और गरीबों समेत आमजन की जेब से धन निकाला जा रहा है।

गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि लोगों की संपत्ति और इस देश की संपत्ति को प्रधानमंत्री के तीन या चार पसंदीदा लोगों को दिया जा रहा है और वित्त मंत्री इसे मौद्रीकरण कहती हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने जीडीपी की नई अवधारणा पेश की है, जिसके अनुसार जीडीपी बढ़ने का अर्थ गैस, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि से है। उन्होंने कहा कि जिस दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 90-100 डॉलर तक पहुंच जाएंगी, तब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।

उन्होंने एक ट्वीट भी किया, ‘‘जीडीपी- गैस, डीजल, पेट्रोल के दामों में उछाल जारी है, सिर्फ उद्योगपति मित्रों के लिए हितकारी है, सवाल करो उससे जिसकी जवाबदारी है।’’

यह पूछे जाने पर कि लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर क्यों नहीं उतर रहे हैं? गांधी ने कहा कि उनकी आवाज को व्यवस्थित रूप से दबाया जा रहा है और मीडिया भी इसे उजागर नहीं करता है। उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन लोगों में जबरदस्त गुस्सा है और यह अंतत: सामने आएगा।’’

गांधी ने आर्थिक स्थिति की तुलना 1991 के संकट से करते हुए कहा, "आज की समस्या चक्रीय नहीं है, बल्कि यह संरचनात्मक समस्या है और दिशा एवं नजरिए को बदले बिना हम इससे बाहर नहीं आ सकते।"

उन्होंने कहा कि 1991 से 2012 तक कांग्रेस द्वारा चलाई गई आर्थिक नीतियों ने कुछ समय बाद काम करना बंद कर दिया और अब एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 1990 की विनाशकारी विफलता के बाद आर्थिक नीतियों को एक नया दृष्टिकोण दिया।

गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री को एक नया दृष्टिकोण देना चाहिए, जो वह नहीं कर रहे हैं। वित्त मंत्री को कुछ भी समझ में नहीं आता। प्रधानमंत्री को विशेषज्ञों से बात करनी चाहिए।" उन्होंने सुझाव दिया कि यदि मोदी, सरकार में बैठे लोगों से बात नहीं करना चाहते, तो कांग्रेस उनके पास विशेषज्ञों को भेज सकती है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘नरेंद्र मोदी ने एक नया दृष्टिकोण लाने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यह (पुराना नजरिया) खोखला है।... एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है।"

उन्होंने प्रधानमंत्री से यह जानने के लिए किसानों, छोटे उद्योगपतियों और दुकानदारों से बात करने का आग्रह किया कि नया दृष्टिकोण कैसा होना चाहिए।

गांधी ने शेयर बाजारों में तेजी का जिक्र करते हुए कहा कि केवल 50 कंपनियां ही लाभान्वित हो रही हैं और बाकी कंपनियां जो रीढ़ की हड्डी हैं और रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी, वे बंद हो रही हैं।

उन्होंने 2014 की शुरुआत में कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार के दौरान और मौजूदा सरकार में रसोई गैस सिलेंडरों, पेट्रोल और डीजल की कीमत संबंधी आंकड़ों की तुलना की।

गांधी ने कहा कि 2014 में जब संप्रग सत्ता में था, तब तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कीमत 410 रुपये प्रति सिलेंडर थी, जो अब 885 रुपये है। संप्रग सरकार के समय 2014 में पेट्रोल 71.5 रुपये प्रति लीटर था, जो अब 101 रुपये प्रति लीटर है और डीजल 57 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 88 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमत 2014 की तुलना में कम हैं, लेकिन भारत में कीमत अब भी बढ़ रही हैं।

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