देश की खबरें | केरल में सहकारी बैंक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल में यहां हाल में धरना देने वाले लोगों के एक समूह ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) द्वारा नियंत्रित एक सहकारी बैंक पर आरोप लगाया है कि उसने एक महिला के इलाज के लिए पैसे देने से इनकार कर दिया जबकि उसके परिवार ने उसमें लाखों रुपये जमा किये थे।
त्रिशूर (केरल), 29 जुलाई केरल में यहां हाल में धरना देने वाले लोगों के एक समूह ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) द्वारा नियंत्रित एक सहकारी बैंक पर आरोप लगाया है कि उसने एक महिला के इलाज के लिए पैसे देने से इनकार कर दिया जबकि उसके परिवार ने उसमें लाखों रुपये जमा किये थे।
लोगों के एक समूह ने हाल में बैंक के सामने इस महिला के शव को रखकर धरना दिया था। इन आरोपों के बाद एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
केरल की सामाजिक न्याय मंत्री आर. बिंदू ने पीड़ित परिवार की सहायता करने की पेशकश की।
हालांकि, सहकारिता मंत्री वी. एन. वासवन ने मृतक महिला के परिवार के इस आरोप को खारिज कर दिया कि बैंक ने बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें पैसे देने से इनकार कर दिया और कहा कि अनुरोध के आधार पर उनकी जमा राशि से 4.60 लाख रुपये प्रदान किए गए थे।
उन्होंने कहा कि इस जिले के करावन्नूर सहकारी बैंक में लोगों द्वारा जमा किए गए कुल 38.75 करोड़ रुपये पहले ही वापस कर दिए गए हैं।
सहकारी बैंक 100 करोड़ रुपये का ऋण घोटाला उजागर होने के बाद और निवेशकों द्वारा अपने पैसे वापस मांगे जाते हुए विरोध प्रदर्शन किये जाने को लेकर पिछले एक साल से चर्चा में रहा है।
बिंदू ने कहा कि इस मामले को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के समक्ष उठाया गया था और सहकारिता मंत्री वी. एन. वासवन ने बैंक को इसके मुद्दों को हल करने के लिए तुरंत 25 करोड़ रुपये देने का आश्वासन दिया था।
बिंदू राज्य विधानसभा में इरिंजालकुडा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं और इसी क्षेत्र में यह बैंक स्थित है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि बैंक मेरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थित है, यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं प्रभावित लोगों के साथ खड़ी रहूं।’’ उन्होंने बताया कि करवन्नूर बैंक को 25 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बैंक ने 70 वर्षीय जमाकर्ता फिलोमिना के इलाज के लिए पहले ही पैसे जारी कर दिए थे, जिनकी इस सप्ताह की शुरुआत में मस्तिष्क में संक्रमण के बाद मृत्यु हो गई थी।
बिंदु ने विरोध को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया था और कहा था कि राजनीतिक लाभ के लिए किसी व्यक्ति के शव का इस्तेमाल करना सही नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘मीडिया के एक वर्ग ने मेरे बयान के केवल संपादित हिस्से दिखाए हैं और इसे गलत तरीके से पेश किया है।’’ उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
वासवन ने प्रेस वार्ता में कहा कि इस संबंध में संयुक्त रजिस्ट्रार की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद मृतक महिला जमाकर्ता के परिवार द्वारा दर्ज की गई शिकायतों पर कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि राज्य सहकारी क्षेत्र में 164 समूह हैं जो विभिन्न कारणों से जमाकर्ताओं को निवेश की गई राशि वापस करने में असमर्थ हैं और उनमें से ज्यादातर कल्याण समितियां, आवास संघ सहकारी समितियां और श्रम सहकारी समितियां हैं।
इस बीच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) जिला नेतृत्व ने एक साल पहले घोटाले का पता चलने पर बैंक को बचाने के वादे के तहत एक संघ के गठन में देरी के लिए सरकार की आलोचना की।
भाकपा की जिला इकाई के सचिव के. के. वलसाराज ने कहा, ‘‘भाकपा का शुरू से ही यह रूख रहा है कि लोगों की जमा राशि की रक्षा की जाए और उसे समय पर वापस किया जाए। हमने यह भी मांग की कि मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।’’
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने कहा कि यह सिर्फ करावन्नूर सहकारी बैंक का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे केरल में ऐसे 164 बैंकों के जमाकर्ता अपने निवेश किए गए धन को वापस नहीं पाने की गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) पिछले एक साल से सहकारी बैंकों में जमा पैसे की गारंटी की मांग कर रहा है। इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने के आश्वासन के बावजूद सरकार ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।’’
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