जरुरी जानकारी | नीति सदस्य ने घरेलू कंपनियों के हित में आयातित वस्तुओं पर सीमा समायोजन कर लगाने की वकालत की
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नयी दिल्ली, 10 जून नीति आयोग के सदस्य वी के सारस्वत ने बुधवार को घरेलू उद्योगों को समान अवसर उपलब्ध करने के लिये आयात पर सीमा समायोजन कर (बीएटी) लगाने की वकालत की।
उन्होंने उन सुधारों को भी चिन्हित करने पर जोर दिया जिसे तत्काल आगे बढ़ाया जा सकता है।
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उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स द्वारा इंटरनेट के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में सारस्वत ने कहा, ‘‘अमेरिका-चीन व्यापार तनाव फिलहाल काफी बढ़ा हुआ है और उच्च स्तर पर पहुंच गया। कोविड-19 के बाद की दुनिया में यह और बढ़ सकता है...इसीलिए हमें घरेलू उद्योग को आयात के मुकाबले समान अवसर उपलब्ध कराने के लिये सीमा समायोजन कर लगाना चाहिए।’’
बीएटी एक प्रकार शुल्क है जिसे आयातित वस्तुओं पर लगाने का प्रस्ताव है। यह सीमा शुल्क के अलावा है जो वस्तु के देश में प्रवेश पर लगाया जाता है।
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सारस्वत ने कहा कि बिजली शुल्क, मंडी कर, स्वच्छ ऊर्जा उपकर, रॉयल्टी आदि जैसे विभिन्न करों से कीमतें बढ़ती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘घरेलू वस्तुओं पर लगने वाले इस प्रकार के करों से आयातित वस्तुओं को कीमत के मामले में एक लाभ मिलता है।’’
उद्योग जगत सरकार से बिजली शुल्क, ईंधन पर कर, स्वच्छ ऊर्जा उपकरण, मंडी कर, रॉयल्टी कर जैसे शुल्क हटाने की मांग करता रहा है। ये शुल्क घरेलू वस्तुओं पर लगाये जाते हैं लेकिन कई आयातित वस्तुओं को संबंधित देशों में इस प्रकार के शुल्क का बोझ नहीं उठाना पड़ता जिससे उन्हें कीमत के मोर्चे पर लाभ मिलता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मादी के आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के बारे में सारस्वत ने कहा कि इसका मतलब अलग-थलग होना नहीं है। ‘‘कई लोग सोचते हैं कि हम पुराने युग में लौट रहे हैं। वे गलत हैं। हमें वैश्विक होना है लेकिन हमारी आपूर्ति व्यवस्था स्थानीय हो।’’
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के पूर्व प्रमुख ने कहा कि भारत जीवन रक्षक उपकरण समेत हर चीज पर दूसरे पर निर्भर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें बुनियादी ढांचे में निवेश करना है...हमें कच्चे माल या आधे रूप से तैयार वस्तुओं पर निर्भरता कम करनी है।’’
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