नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर पुलिस ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि फरवरी में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में साम्प्रदायिक हिंसा के संबंध में गिरफ्तार जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र के इकबालिया बयान के संबंध में सूचना उसके अधिकारियों ने लीक नहीं की हैं।
न्यायमूर्ति विभू बाखरु की अदालत में एक हलफनामा देकर पुलिस उपायुक्त (विशेष प्रकोष्ठ) ने कहा कि जामिया के छात्र आसिफ अकबाल तन्हा का कथित बयान लीक होने संबंधी अखबार में प्रकाशित खबर से दिल्ली पुलिस भी व्यथित है।
अधिवक्ताओं अमित महाजन और रजत नैय्यर के माध्यम से दायर हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि जांच से जुड़े किसी भी अधिकारी ने यह सूचना मीडिया में लीक नहीं की है।
हलफनामे को स्वीकार करते हुए अदालत ने जी न्यूज से उक्त बयान के सूत्र का खुलासा करने को कहा।
न्यायाधीश ने सवाल किया, ‘‘आपने इकबालिया बयान को राष्ट्रीय चैनल पर दिखाया है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने इसे जारी नहीं किया, फिर यह आपको कैसे मिला।’’
इसपर, जी न्यूज की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विजय अग्रवाल ने बताया कि वह इस मुद्दे पर निर्देश लेंगे।
अदालत ने जी न्यूज से कहा कि वह खबर के सूत्र का स्पष्ट खुलासा करते हुए हलफनामा दायर करे। मामले की अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को होनी है।
फेसबुक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत से कहा कि इस मामले में उसका भी पक्ष बनता है।
गौरतलब है कि अदालत तन्हाद्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने जांच के दौरान एजेंसियों द्वारा दर्ज उनके इकबालिया बयान को मीडिया में लीक कर दिया है।
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