जरुरी जानकारी | सौर ऊर्जा मोड्यूल्स विनिर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के लिये पीएलआई योजना को मंजूरी

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नयी दिल्ली, सात अप्रैल सरकार ने बुधवार को देश में सौर बिजली बनाने में काम आने वाले पीवी मोड्यूल्स के देश में विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिये उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) को मंजूरी दी। इस योजना पर सरकार 4,500 करोड़ रुपये व्यय करेगी।

योजना का लक्ष्य एकीकृत सौर पीवी मोड्यूल्स विनिर्माण संयंत्र की दस हजार मेगावाट की नई क्षमता जोड़ना है। इसके तहत सौर पीवी विनिर्माण के क्षेत्र में करीब 17,200 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश होने का अनुमान है।

सरकार के अनुसार पीएलआई योजना से करीब 30 हजार प्रत्यक्ष और 1.2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

आधिकारिक बयान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के उच्‍च कुशलता वाले सोलर पीवी (फोटो वॉल्टिक) मोड्यूल में गीगा वॉट पैमाने की विनिर्माण क्षमता हासिल करने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना...उच्च दक्षता के सौर पीपी मोड्यूल के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम (नेशनल प्रोग्राम ऑन हाई एफिशेंसी सोलर पीवी मेड्यूल) के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना पर 4,500 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

वर्तमान में सोलर क्षमता वृद्धि के लिए मुख्य रूप से आयातित सोलर पीवी सेल और मोड्यूल निर्भरता है, क्‍योंकि घरेलू विनिर्माण उद्योग के पास परिचालन योग्‍य सोलर पीवी सेल और मोड्यूल की सीमित क्षमता है।

बयान के अनुसार उच्च दक्षता के सौर पीवी मोड्यूल के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम से बिजली जैसे महत्‍वपूर्ण क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम होगी। यह ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ पहल का भी समर्थन करेगा।

सौर पीवी विनिर्माताओं को एक पारदर्शी प्रतिस्‍पर्धी निविदा प्रक्रिया के जरिए चुना जाएगा।

सौर पीवी विनिर्माण संयंत्र की शुरुआत के पांच साल के लिए पीएलआई प्रदान की जाएगी और यह उच्‍च कुशलता वाले सौर पीवी मॉड्यूल की बिक्री पर निर्भर करेगा।

विनिर्माताओं को उच्‍च कुशलता वाले सौर पीवी मोड्यूल के साथ-साथ घरेलू बाजार से सामग्री खरीदने के लिए लाभ दिया जाएगा। इस तरह पीएलआई की राशि मोड्यूल दक्षता बढ़ने के साथ-साथ बढ़ती जाएगी और इससे स्‍थानीय मूल्‍य संवर्धन भी बढ़ेगा।

बयान के अनुसार योजना का मकसद समेकित सौर पीवी विनिर्माण संयंत्रों की क्षमता में 10,000

मेगावॉट की वृद्धि करना है।

साथ ही इससे सौर पीवी विनिर्माण परियोजनाओं में 17,200 करोड़ रुपये का प्रत्‍यक्ष निवेश होगा।

इसके अलावा रोजगार के अवसर सृजित होने के साथ उच्‍च कुशलता वाले सौर पीवी मॉड्यूल को हासिल करने के लिए अनुसंधान एवं विकास कार्य में तेजी आएगी।

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