देश की खबरें | विधानसभाओं और संसद में ‘नियोजित व्यवधान’ ठीक नहीं: ओम बिरला
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चंडीगढ़, 14 फरवरी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र की ताकत हैं, लेकिन विधानसभाओं या संसद में ‘‘नियोजित व्यवधान’’ ठीक नहीं है।
बिरला हरियाणा विधानसभा के सदस्यों के लिए शुक्रवार को यहां शुरू हुए दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के मौके पर संवाददाताओं से बात कर रहे थे।
बिरला ने कहा, ‘‘चर्चा और संवाद लोकतंत्र की आत्मा हैं। सहमति या असहमति लोकतंत्र की ताकत हैं, लेकिन मेरा मानना है कि विधानसभा हो या संसद, नियोजित गतिरोध लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘नियोजित गतिरोध का यह नया चलन न तो देश के लिए ठीक है और न ही किसी राज्य के लिए, क्योंकि इससे सदन में व्यवधान पैदा होता है और विधायी कार्य भी प्रभावित होता है, जिससे बहुमूल्य समय बर्बाद होता है।’’
बिरला ने कहा कि यह गर्व की बात है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। उन्होंने कहा कि चाहे वह राज्य विधानसभाएं हों या संसद, आजादी के बाद संविधान के दायरे में रह कर ही नए कानून बनाए गए हैं।
बिरला ने कहा, ‘‘संसद में हमने औपनिवेशिक काल के अनावश्यक कानूनों को खत्म किया। हमने आजादी के बाद समय की जरूरत के हिसाब से नए कानून भी बनाए हैं।’’
एक अच्छा कानून बनाने पर चर्चा और बहस के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कानून बनाना राज्य विधानसभा और लोकसभा का काम है।
विधायकों के बारे में उन्होंने कहा कि लोग उन्हें बड़ी उम्मीदों और आकांक्षाओं के साथ चुनते हैं और चुने हुए प्रतिनिधियों को लोगों के मुद्दों को हल करने का प्रयास करना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वे विधानसभा के सदस्य हैं लेकिन उनके पास राज्य का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों, नीतियों और योजनाओं पर चर्चा करना भी उनकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने विधानसभाओं में सार्थक चर्चा और संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रबोधन कार्यक्रम महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि विधानसभाओं की संसदीय समितियां भी मिनी संसद के रूप में काम करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यपालिका में पारदर्शिता लाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने सदन में मसौदा विधेयकों पर व्यापक चर्चा और बहस पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में यह चलन देखा गया है कि सुबह एक विधेयक पेश किया जाता है और शाम को उसे पारित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह ठीक नहीं है।’’
बिरला ने यह भी कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत ने पिछले 75 वर्षों में सामाजिक और आर्थिक विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने कहा कि चूंकि नए कानून बनाने की जिम्मेदारी राज्य विधानसभाओं और संसद दोनों की होती है, इसलिए विधायकों, खासकर नए विधायकों को प्रशिक्षित करना महत्वपूर्ण है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें विधायी प्रक्रियाओं की पूरी समझ है।
उन्होंने कहा कि इससे राज्य विधानसभाओं में पेश किए जाने वाले विधेयकों पर अधिक प्रभावी चर्चा और संवाद हो सकेगा, जिससे भविष्य में जनता को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि विधायी कार्यों में दक्षता से लोकतंत्र मजबूत होता है।
प्रबोधन कार्यक्रम का उद्घाटन बिरला ने किया और इसका समापन शनिवार को होगा।
एक बयान में कहा गया है कि दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान, हरियाणा विधानसभा के सदस्यों को कार्यपालिका की जवाबदेही, विधायी प्रक्रियाओं में मंत्री की भूमिका और संसदीय विशेषाधिकारों जैसे विभिन्न विषयों पर जानकारी दी जाएगी।
हरियाणा की 15वीं विधानसभा के सदस्यों के लिए प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड), लोकसभा सचिवालय द्वारा हरियाणा विधानसभा सचिवालय के सहयोग से किया जा रहा है।
हरियाणा विधानसभा में 40 सदस्य ऐसे हैं जो पहली बार विधायक बने हैं।
जनता द्वारा निर्वाचित सभी संस्थानों को लघु विधानसभाएं बताते हुए बिरला ने ग्राम पंचायतों, ग्राम सभाओं, नगर पालिकाओं, जिला परिषदों और पंचायत समितियों जैसी संस्थाओं में जनहित पर व्यापक चर्चा के महत्व पर भी जोर दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि विधायी कार्यों के लिए सकारात्मक सुझाव ग्राम सभाओं के माध्यम से भी लिए जाने चाहिए।
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