जरुरी जानकारी | पूजा स्थलों को 'प्रसाद', 'लंगर' के लिए खाद्य सुरक्षा प्रमाण लेने को प्रोत्साहित किया जा रहा है
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. शहरों के धार्मिक स्थलों को, खाद्य सुरक्षा एंव मानक विभाग से 'प्रसाद' और 'लंगर' के 'भोग' का प्रमाणीकरण कराने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ' खाद्य सुरक्षा विभाग, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के आलोक में, इस विषय के बारे में उनका मार्गदर्शन करता है और गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए परीक्षण करता है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
नयी दिल्ली, 13 जुलाई शहरों के धार्मिक स्थलों को, खाद्य सुरक्षा एंव मानक विभाग से 'प्रसाद' और 'लंगर' के 'भोग' का प्रमाणीकरण कराने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ' खाद्य सुरक्षा विभाग, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के आलोक में, इस विषय के बारे में उनका मार्गदर्शन करता है और गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए परीक्षण करता है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
दिल्ली की खाद्य सुरक्षा आयुक्त नेहा बंसल ने कहा कि विभाग ने हाल ही में एक प्रशिक्षण और ऑडिट अभ्यास के बाद अक्षरधाम मंदिर और नजफगढ़ में साईं बाबा मंदिर को भोग प्रमाण पत्र जारी किए हैं।
प्रोजेक्ट भोग (भगवान को आनंदमय स्वच्छ भेंट) भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकार (एफएसएसएआई) द्वारा धार्मिक स्थानों को 'प्रसाद' और अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण और वितरण करने की सर्वोत्तम प्रथाओं को बनाए रखने और अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की एक पहल है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम परियोजना में उनकी भागीदारी के लिए और वहां प्रसाद और स्वच्छता प्रथाओं की सर्वोत्तम गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, ईस्ट आफ कैलाश के इस्कॉन मंदिर सहित शहर के मंदिरों और गुरुद्वारों जैसे कई धार्मिक स्थानों के संपर्क में हैं।’’
विभाग के अधिकारी धार्मिक स्थलों के पदाधिकारियों और प्रबंधकों को 'भोग' प्रमाण पत्र प्राप्त करने और खाद्य सुरक्षा पंजीकरण और लाइसेंस प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए संपर्क कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मूल रूप से एक जागरूकता पहल है जिसमें हम धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को प्रसाद और भोजन तैयार करने और रसोइयों और श्रमिकों द्वारा इसे संभालने की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।’’
विभाग के नामित अधिकारी सौरभ शर्मा ने कहा, ‘‘खाद्य सुरक्षा पंजीकरण और लाइसेंस, बेहतर गुणवत्ता बताने का काम करते हैं।’’
उन्होंने कहा कि विभाग धार्मिक स्थलों की पहचान करता है और अपने प्रबंधन के साथ चर्चा के बाद 'भोग' प्रमाणन प्रक्रिया शुरू करता है।
चिन्हित किए गए धार्मिक स्थलों पर रसोइयों और खाद्य संचालकों को एफएसएसएआई पैनल में शामिल प्रशिक्षकों के माध्यम से 'प्रसाद' सहित खाद्य पदार्थों के निर्माण और वितरण की स्वच्छ प्रथाओं के विभिन्न पहलुओं के बारे में एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है।
लगभग दो महीने तक बंद रहने के बाद हाल ही में शहर के धार्मिक स्थलों को फिर से खोल दिया गया था, लेकिन अभी भी आगंतुकों को अनुमति नहीं है।
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