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देश की खबरें | ‘कक्षा में हर बच्चे का स्थान’: अदालत ने ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चे को दाखिला देने का निर्देश दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी के एक स्कूल को एक ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चे को दाखिला देने का निर्देश देते हुए कहा कि “समावेशी शिक्षा” का उद्देश्य “अपनापन” होना चाहिए।

देश की खबरें | ‘कक्षा में हर बच्चे का स्थान’: अदालत ने ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चे को दाखिला देने का निर्देश दिया

नयी दिल्ली, दो जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी के एक स्कूल को एक ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चे को दाखिला देने का निर्देश देते हुए कहा कि “समावेशी शिक्षा” का उद्देश्य “अपनापन” होना चाहिए।

ऑटिज्म एक विकासात्मक विकार है जो व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार, संवाद करने की क्षमता, और व्यवहार के तरीकों को प्रभावित करता है।

न्यायमूर्ति विकास महाजन ने जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल को ऑटिज्म से पीड़ित एक बालिका को कक्षा एक में दाखिला देने का निर्देश दिया।

न्यायाधीश ने एक जुलाई को कहा, “इस बात पर जोर देने की जरूरत नहीं है कि ‘समावेशी शिक्षा’ सिर्फ शिक्षा तक पहुंच के बारे में नहीं है। यह अपनेपन के बारे में है। यह इस बात को पहचानने के बारे में भी है कि कक्षा में हर बच्चे का अपना स्थान है, इसलिए नहीं कि वे एक जैसे हैं, बल्कि इसलिए कि वे अलग-अलग हैं, और यह अंतर सभी के लिए सीखने के माहौल को समृद्ध बनाता है।”

अधिवक्ता अशोक अग्रवाल द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया है कि बच्ची का जन्म मई 2017 में हुआ था और नवंबर 2019 में एक डॉक्टर को संदेह हुआ कि वह ऑटिज्म से पीड़ित है और उसने उपचार शुरू किया, जिसमें कोविड-19 के कारण व्यवधान आया।

याचिका में दावा किया गया है कि बच्ची को शैक्षणिक सत्र 2021-22 में ‘सिबलिंग क्लॉज’ के तहत स्कूल में दाखिला दिया गया था और उसके माता-पिता ने प्रवेश फॉर्म में बच्ची के बोलने में देरी के बारे में संस्थान को सूचित किया था।

दिसंबर 2021 में, बच्ची में ऑटिज्म के हल्के लक्षणों का पता चला और उसके लिये विभिन्न उपचारों की सिफारिश की गई।

याचिका में दावा किया गया है कि लगातार दबाव और स्कूल की ओर से सहयोग की कमी के कारण जनवरी 2023 से याचिकाकर्ता की शिक्षा बंद कर दी गई।

न्यायाधीश ने स्कूल को निर्देश दिया कि वह बच्चे को दो सप्ताह के भीतर कक्षा एक या आयु-उपयुक्त कक्षा में फीस देने वाले छात्र के रूप में पुनः प्रवेश दे।

इसने शिक्षा निदेशालय को बच्चे के पुनः एकीकरण की निगरानी करने और प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत स्कूल द्वारा समावेशी और गैर-भेदभावपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 02, 2025 07:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).