देश की खबरें | याचिकाकर्ताओं के वकील का दावा, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कुरान की व्याख्या की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हिजाब प्रतिबंध विवाद में याचिकाकर्ताओं के वकील ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पवित्र कुरान की व्याख्या की कोशिश करके और यह कहकर आपत्तिजनक काम किया कि मुस्लिम महिलाओं द्वारा हिजाब पहनना आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है।

नयी दिल्ली, 12 सितंबर हिजाब प्रतिबंध विवाद में याचिकाकर्ताओं के वकील ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पवित्र कुरान की व्याख्या की कोशिश करके और यह कहकर आपत्तिजनक काम किया कि मुस्लिम महिलाओं द्वारा हिजाब पहनना आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है।

उच्चतम न्यायालय के पहले के एक फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अदालतें कुरान की व्याख्या करने के लिहाज से ‘संस्थागत रूप से अक्षम’ हैं।

एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील वाई एच मुछाल ने दावा किया कि कर्नाटक उच्च न्यायालय की व्यवस्था से मुस्लिम लड़कियों के अनेक अधिकार प्रभावित हुए हैं।

न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दलीलें सुन रही थी, जिसमें राज्य के शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया गया था।

वकील ने कहा, ‘‘जहां तक हमारी बात है, हिजाब धर्म का आवश्यक हिस्सा है या नहीं, यह पूरी तरह अप्रासंगिक है। हम वास्तव में लोगों के अधिकारों को लेकर चिंतित हैं, हम मुस्लिम मजहबी हिस्से पर विचार नहीं कर रहे।’’

उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए वकील ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने बहुत ही आपत्तिजनक काम किया है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हमें बताइए कि क्या आपत्तिजनक है।’’

इसके बाद वकील ने शीर्ष अदालत के पहले के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें कहा गया था कि अदालत कुरान की व्याख्या के रास्ते पर नहीं जा सकतीं और उसे नहीं जाना चाहिए और उच्च न्यायालय ने यही किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘अदालतें कुरान की व्याख्या के लिहाज से संस्थागत रूप से अक्षम हैं।’’

हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय में जाकर कहा था कि हिजाब एक आवश्यक धार्मिक प्रथा है।

पीठ ने कहा, ‘‘किसी ने विषय उठाया। उच्च न्यायालय के पास इससे निपटने के अलावा क्या विकल्प था। पहले आप इसे अधिकार होने का दावा करते हैं और जब उच्च न्यायालय इस तरह या उस तरह अपना आदेश देता है तो आप कहते हैं कि यह नहीं हो सकता।’’

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘दरअसल, आप खुद की बात को गलत साबित कर रहे हैं।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

PBKS vs RCB, IPL 2026 61st Match Live Toss And Scorecard: धर्मशाला में पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने जीता टॉस, पहले गेंदबाजी करने का किया फैसला; यहां देखें दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन और लाइव स्कोरकार्ड

Bola Outbreak: कांगो-युगांडा में इबोला के बढ़ते मामलों के बीच WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, जानें यह दुर्लभ महामारी क्या है

Satta Bazar Mein Aaj Kaunsi Team Favourite? धर्मशाला स्टेडियम में पंजाब किंग्स बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच रोमांचक मुकाबले को लेकर सट्टा बाजार का माहौल गर्म, मैच के दिन ये टीम बनी फेवरेट

JEECUP 2026 Registration: यूपी पॉलीटैक्निक प्रवेश परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन की तारीख 17 मई तक बढ़ी, jeecup.admissions.nic.in पर ऐसे करें आवेदन करें