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कोविड-19 के दौरान औद्योगिक इकाइयों को श्रम कल्याण कानूनों से छूट के खिलाफ न्यायालय में याचिका

यह याचिका पंकज कुमार यादव ने अपने वकील निर्मल कुमार अंबष्ठ के माध्यम से दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन राज्यों ने सार्वजनिक आपात स्थिति के दौरान औद्योगिक इकाइयों को श्रम कल्याण कानूनों से छूट प्रदान करने संबंधी फैक्टरी कानून, 1948 की धारा पांच का गलत इस्तेमाल करके इस बारे में अधिसूचना जारी की है। याचिका के अनुसार इस अधिसूचना के तहत श्रमिकों को अदालतों में जाने से वंचित किया गया है और दूसरी ओर फैक्टरियों को फैक्टरी निरीक्षकों के निरीक्षण से छूट दी गयी है।

कोविड-19 के दौरान औद्योगिक इकाइयों को श्रम कल्याण कानूनों से छूट के खिलाफ न्यायालय में याचिका
जमात

नयी दिल्ली, 14 मई कोविड-19 महामारी के मद्देनजर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में औद्योगिक इकाइयों को श्रमिक कल्याण कानूनों से छूट प्रदान करने और उनके काम के घंटे बढ़ाने की अनुमति देने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में बृहस्पतिवार को एक जनहित याचिका दायर की गयी। याचिका में दावा किया गया है कि राज्यों द्वारा इस संबंध में जारी अधिसूचना के तहत श्रमिकों को अदालतों में मामला ले जाने के उनके अधिकारों से वंचित किया गया है।

यह याचिका पंकज कुमार यादव ने अपने वकील निर्मल कुमार अंबष्ठ के माध्यम से दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन राज्यों ने सार्वजनिक आपात स्थिति के दौरान औद्योगिक इकाइयों को श्रम कल्याण कानूनों से छूट प्रदान करने संबंधी फैक्टरी कानून, 1948 की धारा पांच का गलत इस्तेमाल करके इस बारे में अधिसूचना जारी की है। याचिका के अनुसार इस अधिसूचना के तहत श्रमिकों को अदालतों में जाने से वंचित किया गया है और दूसरी ओर फैक्टरियों को फैक्टरी निरीक्षकों के निरीक्षण से छूट दी गयी है।

याचिका में इन तीन राज्यों द्वारा फैक्टरी कानून के तहत जारी अधिसूचनाओं को संविधान में प्रदत्त समता और जीने के अधिकार का उल्लंघन करने वाला बताते हुये इन्हें निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में गुजरात की 17 अप्रैल की अधिसूचना का हवाला देते हुये कहा गया है कि इस कानून की धारा पांच के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुये फैक्टरियों को अपने यहां श्रमिकों के दैनिक कार्य के घंटों की अवधि आठ से बढ़ाकर 12 घंटे और सप्ताह में 48 से बढ़ाकर 72 घंटे करने की छूट प्रदान की गयी है।

इसी तरह, एक अधिसूचना में उन फैक्टरियों को फैक्टरी निरीक्षक से जांच में छूट प्रदान की गयी है जिनमें 50 श्रमिक काम करते हैं।

याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन की वजह से लाखों कामगार बेरोजगार हो गये हैं और ऐसी परिस्थितियों में उनके कल्याणकारी उपायों को वापस लेने के निर्णय से श्रमिकों की परेशानियां बढ़ेंगी और नियोक्ताओं द्वारा उनका शोषण किया जायेगा।

याचिका में राज्यों द्वारा औद्योगिक इकाइयों को छूट देने के लिये फैक्टरी कानून की धारा पांच के इस्तेमाल को चुनौती दी गयी है।

अनूप

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(The above story first appeared on LatestLY on May 14, 2020 08:03 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).