पृथक-वास केंद्रों में 1408 लोगों को ‘रोके जाने’ के खिलाफ याचिका

नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति ए. एस. किलोर ने स्थानीय निवासी मोहम्मद निशत की तरफ से दायर याचिका पर त्वरित सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर निकाय के अधिकारियों ने सतरंजीपुरा और मोमीनपुरा इलाकों के 1408 लोगों को अवैध रूप से इस आधार पर रोक रखा है कि वे उन लोगों के संपर्क में थे जिनमें कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुई।

जमात

नागपुर, चार मई बंबई उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर महाराष्ट्र सरकार और नागपुर नगर निगम से जवाब मांगा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि निकाय के अधिकारियों ने कोरोना वायरस के दो हॉटस्पॉट इलाकों में 1408 लोगों को ‘‘अवैध रूप से रोक रखा है’’ और उन्हें पृथक-वास केंद्रों में रखा गया है।

नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति ए. एस. किलोर ने स्थानीय निवासी मोहम्मद निशत की तरफ से दायर याचिका पर त्वरित सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर निकाय के अधिकारियों ने सतरंजीपुरा और मोमीनपुरा इलाकों के 1408 लोगों को अवैध रूप से इस आधार पर रोक रखा है कि वे उन लोगों के संपर्क में थे जिनमें कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुई।

याचिकाकर्ता के वकील तुषार मांडलेकर के अनुसार अधिकारियों ने 1408 लोगों को उठाया और इस तरह केंद्र सरकार तथा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) के मानक प्रोटोकॉल और दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया।

मांडलेकर ने कहा कि जिन लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है अथवा उनके संपर्क में आने वाले लोगों को रोका जाएगा और 14 दिनों के लिए पृथक- वास में भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन 1408 लोगों को रोका गया है वे इस श्रेणी में नहीं आते हैं और इसलिए उन्हें रोका जाना उनके मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है।

बहरहाल, नागपुर नगर निकाय के वकील सुधीर पुराणिक ने अदालत से कहा कि संबंद्ध अधिकारियों से प्राप्त प्रारंभिक सूचना के मुताबिक जिन लोगों की पहचान अति खतरे वाले संपर्क के तौर पर हुई है उन्हें ही पृथक-वास केंद्रों में ले जाया गया है।

पुराणिक ने अदालत से कहा कि कोविड-19 के संदर्भ में जारी सभी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।

इसके बाद मांडलेकर ने अदालत से कहा कि एमएलए हॉस्टल विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (वीएनआईटी) में बने पृथक-वास केंद्रों में इन लोगों को भेजा गया है जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित हैं।

अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख पांच मई तय की है और सरकार तथा नागपुर नगर निगम को अपने हलफनामे दायर करने के निर्देश दिए हैं।

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