जरुरी जानकारी | कीटनाशक विनिर्माताओं ने अपने उत्पादों का विविधीकरण का मार्ग अपनाया: रिपोर्ट

मुंबई, 24 जुलाई सरकार के 27 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव के मद्देनजर, ज्यादातर निर्माताओं ने अपनी आय बुरी तरह से पभावित होने से बचने के लिए अपने उत्पादों में विविधता लानी शुरू कर दी है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सरकार ने इन 27 कीटनाशकों के उच्च विषाक्तता स्तर और मिट्टी के स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव का हवाला देते हुए मई में प्रतिबंध के आदेश का एक मसौदा जारी किया।

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सरकार ने अगस्त 2020 के मध्य तक इस प्रस्ताव पर विभिन्न अंशधारकों से प्रतिक्रिया मांगी है।

क्रिसिल ने कहा कि कोविड ​​-19 महामारी के कारण इस प्रतिबंध को चालू वित्तीय वर्ष में लागू नहीं होने की संभावना है और जैसा कि अतीत में देखा गया है, इस तरह के प्रतिबंध चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाते हैं।

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किसानों और कीटनाशक कंपनियों दोनों के समक्ष महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियों को देखते हुए, सरकार के द्वारा अब अगले वित्तीय वर्ष से ही अंतिम प्रतिबंध को लागू किये जाने की संभावना है जो चरणबद्ध तरीके से ही किया जा सकता है।

क्रिसिल ने कहा कि इसके अलावा, इन उत्पादों की वार्षिक बिक्री का 50 प्रतिशत से अधिक वित्तवर्ष 2020-21 के चालू खरीफ सत्र में पूरा हो जाएगा।

क्रिसिल रेटिंग निदेशक समीर चरणिया ने कहा, ‘‘"प्रतिबंध की आशंका के कारण, अधिकांश कंपनियों ने हाल के वर्षों में अपने उत्पाद का विविधीकरण करने और अपनी भौगोलिक पहुंच में विविधता लाने की पहले ही शुरू कर दी थी। अंतिम आदेश के अपेक्षित चरणबद्ध कार्यान्वयन की वजह से, कंपनियों को जेनेरिक विकल्प और सह-विपणन के माध्यम से अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को पुनर्समायोजन हासिल करने का मौका मिलेगा और उन्हें अपने आय पर आने वाले झटके को कम करने में मदद मिलेगी।

इसके अतिरिक्त, सरकार मामला दर मामला आधार पर इन उत्पादों के निर्यात की अनुमति दे रही है, जिससे 40 प्रतिशत राजस्व प्राप्त होता है।

उल्लेखनीय है, इन 27 कीटनाशकों में से 20 लैटिन अमेरिका, संयुक्त राज्य अमेरिका, एशिया प्रशांत और यूरोपीय संघ जैसे क्षेत्रों में निर्यात किए जाते हैं, जहां उनके उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

क्रिसिल के अनुसार, प्रतिबंध की वजह से कृषि रसायन कंपनियों के ऋण साख पर कोई प्रभाव होने की संभावना नहीं है जो समय-समय पर मजबूत मांग और लाभप्रदता के साथ-साथ विवेकपूर्ण पूंजीगत व्यय और कार्यशील पूंजी प्रबंधन के कारण मजबूत हुई है।

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