देश की खबरें | मौलिक कर्तव्यों का पालन एक सतत कार्य है: अटॉर्नी जनरल ने न्यायालय से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि मौलिक कर्तव्यों का पालन एक सतत कार्य है और हमेशा रहेगा, जिसके लिए कर्तव्य-विशिष्ट कानून, योजनाएं और पर्यवेक्षण की आवश्यकता होगी।

नयी दिल्ली, 11 सितंबर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि मौलिक कर्तव्यों का पालन एक सतत कार्य है और हमेशा रहेगा, जिसके लिए कर्तव्य-विशिष्ट कानून, योजनाएं और पर्यवेक्षण की आवश्यकता होगी।

वेंकटरमणी ने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ से कहा कि उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने बार-बार दोहराया है कि न्यायपालिका का काम विधायिका को किसी विशेष तरीके से कानून बनाने का निर्देश देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालयों को किसी भी कथित अंतर को भरने के लिए कदम उठाने में सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर तब जब विधायिका द्वारा मुद्दे पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा हो।

शीर्ष अदालत वकील दुर्गा दत्त द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अच्छी तरह परिभाषित कानून/नियम बनाने के लिए केंद्र को निर्देश देने का आग्रह किया गया है।

वेंकटरमणी ने अपने लिखित नोट में कहा, ‘‘न्यायपालिका और विशेष रूप से यह न्यायालय, जहां तक ​​संभव है, मौलिक कर्तव्यों के पालन को लेकर कदम उठाने में लगातार सक्रिय रहा है। विभिन्न मामलों में मौलिक कर्तव्यों के महत्व की पड़ताल करते हुए इस न्यायालय ने लगातार यह राय व्यक्त की है कि ऐसे कर्तव्य संवैधानिक और कानूनी मुद्दों की व्याख्या के लिए एक मूल्यवान मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान करते हैं, साथ ही भारत के सभी नागरिकों पर एक सामाजिक दायित्व भी डालते हैं।’’

शीर्ष अदालत ने 21 फरवरी 2022 को इस मामले में केंद्र को नोटिस जारी करते हुए शीर्ष विधि अधिकारी से सहायता मांगी थी।

वेंकटरमणी ने अपने नोट में कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि मौलिक कर्तव्यों का पालन एक सतत कार्य है और हमेशा रहेगा, जिसके लिए कर्तव्य-विशिष्ट कानून, योजनाएं और पर्यवेक्षण की आवश्यकता होगी। शिक्षा और संस्कृति से संबंधित केंद्रीय और राज्य स्तर के मंत्रालयों से कहा जा सकता है कि वे उपरोक्त संबंध में काम करते रहें।’’

शीर्ष अदालत मामले में अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद करेगी।

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