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देश की खबरें | लोगों की जान खतरे में है; सरकार आंख मूंद सकती है, अदालत नहीं; पूरा देश ऑक्सीजन के लिए तड़प रहा है : अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केन्द्र सरकार के विधि अधिकारी द्वारा यह कहे जाने पर कि कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन की कमी को लेकर अदालत भावुक ना हो, दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को फटकार लगाते हुए कहा कि लोगों की जान खतरे में हैं और ऐसे में सरकार आंख मूंद सकती है लेकिन अदालत नहीं।

देश की खबरें | लोगों की जान खतरे में है; सरकार आंख मूंद सकती है, अदालत नहीं; पूरा देश ऑक्सीजन के लिए तड़प रहा है : अदालत

नयी दिल्ली, चार मई केन्द्र सरकार के विधि अधिकारी द्वारा यह कहे जाने पर कि कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन की कमी को लेकर अदालत भावुक ना हो, दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को फटकार लगाते हुए कहा कि लोगों की जान खतरे में हैं और ऐसे में सरकार आंख मूंद सकती है लेकिन अदालत नहीं।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि ‘‘पूरा देश आज ऑक्सीजन के लिए तड़प रहा है’’, सिर्फ दिल्ली ही नहीं, अन्य राज्य भी।

सुनवाई के दौरान केन्द्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि वे उच्चतम न्यायालय के 30 अप्रैल के आदेश की अनुपालना रिपोर्ट दायर करने वाले हैं और इस मामले में नहीं पड़ेंगे कि दिल्ली को रोजाना 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही है या सिर्फ जरुरत पूरी की जा रही है।

शर्मा ने कहा कि कल आधी रात को दिल्ली में 433 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचा और 307 मीट्रिक टन आज सुबह पहुंचा और आशा है कि शाम तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध होगा।

दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि केन्द्र को दिल्ली को 590 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देना है और सिर्फ 420 मीट्रिक टन की आपूर्ति के कारण लोग मर रहे हैं।

शर्मा ने इसपर जवाब दिया, ‘‘यह रटना बंद करिए कि लोग मर रहे हैं।’’

इससे नाराज होकर पीठ ने कहा, ‘‘क्या यह सिर्फ रटने की बात है, तथ्य नहीं है? क्षमा करिए श्रीमान शर्मा, लेकिन यह सही नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।’’

जब शर्मा ने कहा कि भावुक ना हों, इसपर पीठ ने कहा, ‘‘जब लोगों की मौत हो रही है तो यह भावनात्मक मुद्दा है। लोगों की जान खतरे में है। आप आंख मूंद सकते हैं, हम नहीं। आप इतने संवेदनहीन कैसे हो सकते हैं।’’

अर्पणा उमा

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(The above story first appeared on LatestLY on May 04, 2021 09:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).