विदेश की खबरें | हमले की आशंका को लेकर लोग घबराएं नहीं: श्रीलंकाई रक्षा मंत्रालय

कोलंबो, चार जुलाई श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को लोगों से आगाह किया कि वह लिट्टे की ओर से पांच जुलाई को मनाए जाने वाले ‘ब्लैक टाइगर दिवस’ पर आतंकी हमले की कथित खुफिया जानकारी से घबराएं नहीं। इससे कुछ घंटे पहले विपक्षी दल जनता विमुक्ती पेरामुना (जेवीपी) ने सरकार से कथित साज़िश की जानकारी साझा करने का आग्रह किया था।

जेवीपी नेता अनुरा कुमार दिशानायके ने पत्रकारों से कहा कि पुलिस प्रमुख सीडी विक्रमरत्ने ने रक्षा मंत्रालय के सचिव कमल गुणारत्ने को 27 जून को लिखे एक पत्र में उन्हें कथित धमकी को लेकर आगाह किया है।

एक बयान में रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को लोगों से कथित आतंकवादी हमले की खुफिया सूचना से नहीं घबराने की अपील की। इस बाबत जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही है।

‘डेली मिरर’ की खबर के मुताबिक, मंत्रालय ने कहा कि पुलिस महानिरीक्षक ने रक्षा सचिव को एक पत्र भेजकर आतंकी हमले की आशंका जताई है और कहा है कि पांच और छह जुलाई को आतंकी हमले की जानकारी खुफिया सूत्रों से मिली है और यह अपुष्ट है।

उसने कहा कि मंत्रालय को सूचित किया गया है कि आतंकवादी समूहों और सरकार विरोधी समूह हमले कर सकते हैं और सरकार को बदनाम करने और अस्थिर करने के लिए हिंसा को भड़का सकते हैं।

दिशानायके ने दावा किया कि एक अज्ञात विदेशी खुफिया एजेंसी ‘ब्लैक टाइगर’ दिवस के मौके पर पांच या छह जुलाई को या तो उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र में या दक्षिणी क्षेत्र में विस्फोट कर सकती है। उन्होंने विदेशी एजेंसी का नाम नहीं बताया।

उक्त पत्र में पुलिस प्रमुख की ओर से रक्षा सचिव को मुहैया कराई गई जानकारी के मुताबिक, जाफना में स्थित सभी विदेशी प्रतिष्ठानों के समस्त कर्मचारियों और अन्य वीआईपी को दो दिन तक घरों में ही रहने की सलाह दी गई है।

दिशानायके ने सरकार से आग्रह किया कि इस जानकारी का कैसे पता चला, इसका पूरा ब्यौरा साझा किया जाए या यह मौजूदा आर्थिक एवं ईंधन संकट को लेकर चल रहे प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की सरकार की कोशिश है?

लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई या लिट्टे) ने पांच जुलाई 1987 को पहला आत्मघाती हमला किया था। इसकी याद में जुलाई के शुरू में ‘ब्लैक टाइगर वीक’ मनाया जाता है। एलटीटीई ने श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र में पृथक तमिल राज्य की स्थापना के लिए 30 साल तक हिंसक अभियान चलाया था।

एलटीटीई को मई 2009 में हरा दिया गया था।

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