ताजा खबरें | जम्मू कश्मीर में ‘सत्यापन’ के नाम पर लोगों को सताया जा रहा : नेकां सांसद
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में दावा किया कि जम्मू कश्मीर में ‘‘सत्यापन’’ के नाम पर लोगों को सताया जा रहा है और किसी व्यक्ति के आतंकी गतिविधि में लिप्त पाये जाने पर उसके सारे रिश्तेदारों को प्रताड़ित किया जाता है।
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में दावा किया कि जम्मू कश्मीर में ‘‘सत्यापन’’ के नाम पर लोगों को सताया जा रहा है और किसी व्यक्ति के आतंकी गतिविधि में लिप्त पाये जाने पर उसके सारे रिश्तेदारों को प्रताड़ित किया जाता है।
मेहदी ने सदन में शून्यकाल के दौरान कहा कि उन्होंने गृह मंत्रालय के समक्ष यह मुद्दा उठाया था, लेकिन अब तक इसका जवाब नहीं मिला है।
उन्होंने दावा किया, ‘‘जम्मू कश्मीर में सत्यापन के नाम पर लोगों को सताया जा रहा। अगर कोई व्यक्ति किसी आतंकी गतिविधि में कहीं लिप्त पाया जाता है तो उसकी सजा सारे रिश्तेदारों को दी जाती है। नौकरी और पासपोर्ट के लिए सत्यापन, कारोबार का सत्यापन नहीं किया जाता है।’’
नेकां सांसद ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के अपराध के लिए उसके पूरे परिवार और रिश्तेदारों को सजा देना संविधान और कानून के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने भी इस बारे में निर्देश दिया है।
वहीं, जम्मू कश्मीर के बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों का सरकार से ख्याल रखने की अपील करते हुए कहा कि वहां के लोगों के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक अधिकारों और मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।
उन्होंने कटरा-बारामूला रेल लिंक का उद्घाटन करने के लिए प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) के प्रस्तावित कश्मीर दौरे का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘मेरे निर्वाचन क्षेत्र में 18 विधानसभा क्षेत्र हैं। मैं जेल में हूं लेकिन मेरे लोगों का ख्याल रखा जाए ताकि वे अपने अधिकारों से वंचित न हों। राज्य सरकार, जम्मू से लेकर दिल्ली तक की नौकरशाही से अनुरोध करता हूं कि मेरे लोगों का ख्याल रखा जाए।’’
निर्दलीय सांसद ने कहा, ‘‘जब प्रधानमंत्री पिछली बार जम्मू कश्मीर गए थे तो मुख्यमंत्री (उमर अब्दुल्ला) ने उनसे कहा था कि ‘आसमान बिल्कुल साफ है’ लेकिन मेरा यह कहना है कि ‘आसमान में गहरे बादल’ हैं, मेहबानी कर उस बारे में भी सोचिए। हमारे लोगों के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक अधिकारों और मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।’’
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