जरुरी जानकारी | मूंगफली, सीपीओ, पामोलीन में सुधार; सोयाबीन तेल में गिरावट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में कमजोरी के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को जहां सोयाबीन तेल कीमतो में गिरावट आई वहीं मांग निकलने से मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चे पामतेल और पामोलीन तेल कीमतें सुधार के साथ बंद हुईं।
नयी दिल्ली, 12 जुलाई विदेशी बाजारों में कमजोरी के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को जहां सोयाबीन तेल कीमतो में गिरावट आई वहीं मांग निकलने से मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चे पामतेल और पामोलीन तेल कीमतें सुधार के साथ बंद हुईं।
बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में लगभग दो प्रतिशत की गिरावट रही जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में फिलहाल 2.5 प्रतिशत की गिरावट है। विदेशों की इस गिरावट से सोयाबीन तेल के दाम टूट गये जबकि डीआयल्ड केक (डीओसी) की मांग होने से सोयाबीन दाना एवं लूज के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे। मंडियों में सरसों की कम आवक के बीच सरसों तेल-तिलहन के भाव भी पूर्वस्तर पर बंद हुए।
सूत्रों ने कहा कि स्थानीय मांग होने के कारण मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में सुधार आया और कीमतें मजबूत बंद हुई। इसके अलावा मांग निकलने के कारण सीपीओ, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतें भी सुधार दर्शाती बंद हुईं।
सूत्रों ने कहा कि सोमवार को खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने तेल संगठनों एवं अन्य अंशधारकों को लिखित प्रतिवेदन देने को कहा था कि वे बतायें कि जैतून और चावल भूसी तेल के आयात शुल्क को कम करने से देश में इस खाद्य तेल की उपलब्धता कैसे बढ़ेगी।
सूत्रों ने कहा कि चावल भूसी तेल का अधिशेष मात्रा में उत्पादन होता है और ज्यादातर इस तेल का इस्तेमाल अन्य तेलों में सम्मिश्रण और मिलावट करने के लिए किया जाता है। पिछले दिनों ब्लेंडिंग बंद किये जाने के बाद मिलावट की गड़बड़ी पाये जाने पर देखा गया कि इन तेलों में चावल भूसी तेल की मिलावट हुई थी। इसके अलावा सितंबर-अक्टूबर में पंजाब, हरियाणा में धान की फसल आ जायेगी तो फिर आयातित तेल कहां खपेंगे?
सूत्रों ने कहा कि जैतून का तेल (ऑलिव आयल) महंगा होता है और इसका खाने के लिए उपभोग भी अधिक आय वर्ग के लोग करते हैं। मध्यम वर्ग या सामान्य जन इस तेल का इस्तेमाल खाने के लिए शायद ही करते हैं। सूत्रों ने कहा कि ऐसे में इस तेल पर आयात शुल्क कम करने की तेल निकायों की मांग का कोई औचित्य नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि बाजार में सरसों की आवक निरंतर घट रही है जबकि त्योहारों के दौरान सरसों की दिक्कत हो सकती है। उक्त तेल संगठनों को खाद्य तेलों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की निगरानी रखने में सरकार की मदद करनी चाहिये। सरकार को तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने के भरपूर प्रयास करने होंगे तभी इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 7,320-7,370 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,785 - 6,910 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,850 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,655 - 2,845 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 14,750 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,330-2,410 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,370-2,475 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 17,000-18,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,750 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 11,120 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 14,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,000 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 11,800 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 6,400-6,450 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज 6,100- 6,150 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 12, 2022 07:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

