देश की खबरें | पूर्ववर्ती एसडीएमसी की भुगतान प्रणाली अन्य क्षेत्रों में लागू की जाए: एमसीडी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने शुक्रवार को कहा कि पूर्ववर्ती दक्षिण दिल्ली नगर निगम की वेतन भुगतान प्रणाली का एकीकृत नगर निकाय के अन्य क्षेत्रों (जोन) में विस्तार किया जाए।

नयी दिल्ली, तीन जून दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने शुक्रवार को कहा कि पूर्ववर्ती दक्षिण दिल्ली नगर निगम की वेतन भुगतान प्रणाली का एकीकृत नगर निकाय के अन्य क्षेत्रों (जोन) में विस्तार किया जाए।

एमसीडी ने एक बयान में कहा कि निगम आयुक्त ज्ञानेश भारती ने वित्त विभाग को भुगतान गेटवे के रूप भी विभिन्न विभागों के ‘‘नए बैंक खाते’’ खोलने का निर्देश दिया है।

इसने कहा, ‘‘ इसके अलावा, इंडियन बैंक द्वारा तैयार जीपीएफ और पेंशन मॉड्यूल अंतिम चरण में हैं।’’

निकाय ने कहा, ‘‘ पूर्ववर्ती निगमों के पहले से विद्यमान खातों को पांच जून, 2022 तक सक्रिय रखा जाएगा ताकि तृतीय पक्ष एजेंसियों द्वारा की जा रही ऑनलाइन भुगतान संबंधी कार्रवाई और बीच में फंसे किसी चेक को भुनाया जा सके और पिछले बैंक खातों में रकम प्रविष्टि हो।’’

बयान के अनुसार, पुराने आयुक्त खातों में बची राशि नए खुले खातों में अंतरित की जाएगी ताकि वेतन जैसा नियमित भुगतान एवं अन्य आकस्मिक व्यय निर्बाध रूप से किया जा सके।

एकीकृत दिल्ली नगर निगम 22 मई को औपचारिक रूप से अस्तित्व में आ गया तथा आईएएस अधिकारी अश्विनी कुमार एवं ज्ञानेश भारती ने क्रमश: नए निकाय के विशेष अधिकारी एवं आयुक्त के रूप में पदभार संभाला।

शीला दीक्षित सरकार के दौरान एमसीडी को तीन भागों में बांट दिया गया था। तीनों-- उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी नगर निगमों को मिलाकर अब इसे एकीकृत रूप दे दिया गया है।

बयान में कहा गया, ‘‘ पूर्ववर्ती एसडीएमसी अपने सभी चारों क्षेत्रों में कर्मचारी भुगतान प्रणाली सफलतापूर्वक चला रहा था। यही प्रणाली बाकी आठ क्षेत्रों में भी लागू की जाएगी। इसके साथ ही, पृथक क्षेत्रीय आय खाते आसान लेखा एवं रिकॉर्ड मिलान के लिए खोले गए हैं। इन खातों में संग्रहित राशि को एमसीडी आयुक्त के महाखाते में साप्ताहिक आधार पर अंतरित किया जाएगा।’’

इसमें कहा गया कि एमसीडी आयुक्त की मंजूरी से हर भुगतान गेटवे के लिए बैंक खाते खोले गए हैं और इस संबंध में आई टी विभाग को सूचना दे दी गयी है तथा इससे विभिन्न आय मदों के तहत आय एवं लेखा मिलान में आसानी होगी।

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