ताजा खबरें | पुरावशेष मिशन के तहत दस्तावेजीकरण की धीमी रफ्तार पर संसदीय समिति ने चिंता व्यक्त की
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. देश में अब तक केवल 30 प्रतिशत पुरावशेषों का ही दस्तावेजीकरण किये जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए संसद की एक समिति ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से उसके सभी स्थल संग्रहालयों में दस्तावेजीकरण प्रक्रिया 2023 तक पूरा करने और इसकी अद्यतन जानकारी देने को कहा है।
नयी दिल्ली, 24 जुलाई देश में अब तक केवल 30 प्रतिशत पुरावशेषों का ही दस्तावेजीकरण किये जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए संसद की एक समिति ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से उसके सभी स्थल संग्रहालयों में दस्तावेजीकरण प्रक्रिया 2023 तक पूरा करने और इसकी अद्यतन जानकारी देने को कहा है।
संसद के दोनों सदनों में सोमवार को पेश ‘‘विरासत से जुड़ी चीजों की चोरी-भारतीय पुरावशेषों का अवैध व्यापार और हमारी मूर्त सांस्कृतिक विरासत का पुनरूद्धार एवं सुरक्षा में आने वाली चुनौतियां’’ विषय पर वाईएसआर कांग्रेस के विजय साई रेड्डी की अध्यक्षता वाली विभाग संबंधित परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति इस बात पर संज्ञान लेती है कि राष्ट्रीय स्मारक और पुरावशेष मिशन की स्थापना के 15 वर्ष बाद कुल अनुमानित 58 लाख पुरावशेषों में से आज तक केवल 16.8 लाख पुरावशेषों अर्थात लगभग 30 प्रतिशत का दस्तावेजीकरण किया गया है।
इसके अलावा, समिति को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक द्वारा साक्ष्य में सूचित किया गया था कि 58 लाख पुरावशेषों का आंकड़ा केवल अनुमान है और भारत में और भी कई पुरावशेष मौजूद हो सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ यदि ऐसा है तो यह राष्ट्रीय स्मारक और पुरावशेष मिशन के तहत प्रलेखन की धीमी गति को और चिंताजनक बना देता है।’’
एएसआई द्वारा समिति को सूचित किया गया है कि पूरे देश में उसके 55 स्थल संग्रहालयों में दस्तावेजीकरण का कार्य चल रहा है और वर्ष 2023 तक इसके पूरा होने की संभावना है।
समिति का मानना है कि एएसआई के स्वामित्व वाले स्थलों में दस्तावेजीकरण का कार्य बहुत पहले सम्पन्न हो जाना चाहिए था।
समिति इसे आश्चर्यजनक मानती है कि पुरावशेषों की चोरी के खिलाफ प्रमुख निवारक उपायों में से एक के रूप में प्रलेखन पर जोर देने के साथ एएसआई ने स्वयं अपने स्थल संग्रहालयों में पुरावशेषों का दस्तावेजीकरण नहीं किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने यह भी कहा कि ऐसा तब है जब संस्कृति मंत्रालय 1961 से अस्तित्व में है और एएसआई, मंत्रालय से एक सदी पहले का है।
समिति ने कहा कि इन दोनों संगठनों की प्राचीनता और हमारी विरासत के संरक्षण के लिए किये गए वर्षों के प्रयास और धन आवंटित किये जाने के बावजूद प्रलेखन कार्य में प्रगति संतोषजनक नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति सिफारिश करती है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) यह सुनिश्चित करे कि उसके सभी स्थल संग्रहालयों में प्रलेखन प्रक्रिया 2023 तक पूरी हो जाए और उसे दस्तावेजीकरण के पूरा होने की भी जानकारी दी जाए।
समिति ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय संग्रहालय में डिजिटलीकरण की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है और मंत्रालय से इस प्रक्रिया में तेजी लाने और मिशन के आधार पर डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को पूरा करने की सिफारिश की गयी।
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