ताजा खबरें | संसदीय समिति ने रेल मंत्रालय से विद्युत रेल इंजन की जरूरतों पर गहन निगरानी रखने को कहा

नयी दिल्ली, 22 दिसंबर संसद की एक समिति ने रेलवे में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के मद्देनजर विद्युत रेल इंजन के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के महत्व को रेखांकित करते हुए रेल मंत्रालय से अपनी उत्पादन इकाइयों की क्षमता और विद्युत रेल इंजन की जरूरतों पर गहन निगरानी रखने को कहा है।

लोकसभा में बृहस्पतिवार को पेश रेल मंत्रालय के अनुदान की मांगों पर रेल संबंधी स्थायी समिति के 11वें प्रतिवेदन में अंतर्विष्ट सिफारिशों/टिप्पणियों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

भारतीय जनता पार्टी के सांसद राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे ब्रॉडगेज लाइन का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण करने की दिशा में बढ़ रहा है जिससे डीजल इंजन की जरूरत काफी कम हो जायेगी और इलेक्ट्रिक इंजन की संख्या बढ़ जायेगी।

संसदीय समिति ने कहा कि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्ल्यू) और पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स (पीएलडब्ल्यू) को वर्ष 2022-23 और वर्ष 2023-24 के लिए क्रमश: 450 और 200 विद्युत रेल इंजन का उत्पादन करने का लक्ष्य दिया गया।

इसमें कहा गया है कि वर्ष 2021-22 में फरवरी 2022 तक इन दोनों इकाइयों में क्रमश: 104 और 331 विद्युत इंजन का निर्माण किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार समिति का दृढ़ विश्वास है कि इलेक्ट्रिक रेल इंजन के निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि 100 प्रतिशत विद्युतीकरण, समर्पित माल गलियारा (डीएफसी) प्रारंभ होने और हाल ही में घोषित वंदे भारत ट्रेनों आदि की शुरूआत के लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद इन रेल इंजनों की मांग काफी बढ़ जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘ समिति अपनी पूर्ववर्ती सिफारिश को दोहराती है और मंत्रालय को अपनी उत्पादन इकाइयों की क्षमता और विद्युत रेल इंजन की संभावित आवश्यकता पर कड़ी निगरानी रखने पर बल देती है।’’

रेल मंत्रालय ने अपनी की गयी कार्रवाई में बताया कि विद्युत इंजन का उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है ताकि विद्युतीकरण की बढ़ी हुई गति के अनुरूप अतिरिक्त विद्युत इंजन की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

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