ताजा खबरें | संसदीय समिति ने समय और लागत बढ़ाये बिना नमामि गंगे परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. संसद की एक समिति ने नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 20 हजार करोड़ रूपये की निर्धारित राशि में से पिछले साढ़े पांच वर्ष में करीब आधी रकम खर्च होने पर चिंता व्यक्त करते हुए परियोजनाओं का समय और लागत बढ़ाये बिना इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया है ।

नयी दिल्ली, नौ मार्च संसद की एक समिति ने नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 20 हजार करोड़ रूपये की निर्धारित राशि में से पिछले साढ़े पांच वर्ष में करीब आधी रकम खर्च होने पर चिंता व्यक्त करते हुए परियोजनाओं का समय और लागत बढ़ाये बिना इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया है ।

लोकसभा में पेश जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत सरकार ने प्रदूषण को कम करने, राष्ट्रीय नदी गंगा और इसकी सहायक नदियों के संरक्षण और पुनरूद्धार के दोहरे उद्देश्य को प्राप्त करने के लिये वित्तवर्ष 2014-15 से 31 दिसंबर 2020 तक की अवधि के लिये 20 हजार करोड़ रूपये के कुल बजट परिव्यय के साथ नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया है ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस योजना के अंतर्गत 20 हजार करोड़ रूपये की निर्धारित राशि में से 31 दिसंबर 2020 तक विभिन्न घटकों के अंतर्गत 9781.38 करोड़ रूपये ही खर्च किये गए ।

समिति ने यह भी कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत 31 जनवरी 2021 की स्थिति के अनुसार 29578.05 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से कुल 335 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं जिनमें से 10061.91 करोड़ रूपये ही खर्च हुए हैं ।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने यह भी पाया कि वर्ष 2011 से गंगा नदी की सफाई के लिये 378.54 करोड़ लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की नई जलमल शोधन क्षमता, 1081.89 एमएलडी क्षमता के पुनर्निमाण और लगभग 5066 किलोमीटर जलमल नेटवर्क को बिछाने के लिये 23,521 करोड़ रूपये की स्वीकृत लागत से 156 जलमल अवसंरचना परियोजना पर काम किया गया।

समिति ने कहा, ‘‘ हालांकि, दिसंबर 202 तक इनमें से केवल 56 परियोजनाएं पूरी की गई हैं जिससे 789.9 एमएलडी जलमल शोधन संयंत्र (एसटीपी) क्षमता (परिकल्पित लक्ष्य का लगभग 21 प्रतिशत) और 3347.23 किलोमीटर जलमल नेटवर्क बिछाने का काम किया गया जो कि लक्ष्य का 66 प्रतिशत है । ’’

संसदीय समिति ने कहा कि वह नमामि गंगे कार्यक्रम यह टिप्पणी करने के लिये बाध्य है कि इस कार्यक्रम का कार्यान्वन परिकल्पित समय सीमा के अंतर्गत नहीं किया जा सका है ।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ परियोजनाओं के कार्यान्वयन की धीमी गति और किये गए कम व्यय को संज्ञान में लेकर समिति, विभाग से आग्रह करती है कि ऐसे सभी संभव प्रयास किये जाए ताकि परियोजनाओं को समय और लागत बढ़ाये बिना इसे समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके । ’’

समिति ने सिफारिश की है कि नदी के तल की दशा का विश्लेषण और आकलन करने के लिये अध्ययन कराया जाए जिसके आधार पर नदी के तल का इष्टतम स्तर बनाए रखा जा सके।

दीपक माधव

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