देश की खबरें | संसदीय समिति ने आपराधिक कानूनों की जगह लेने वाले विधेयकों पर रिपोर्ट स्वीकार की

नयी दिल्ली, छह नवंबर गृह मामलों से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने ‘औपनिवेशिक’ काल के कानूनों के स्थान पर लाए गए तीन विधेयकों की जांच कर रही संसदीय समिति ने सोमवार को अपनी मसौदा रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इसमें कई संशोधन सुझाए गए हैं और प्रस्तावित कानूनों के हिंदी नामों को बरकरार रखने पर भी जोर दिया गया है।

समिति में शामिल लगभग 10 विपक्षी सदस्यों के लिखित में अपनी असहमति दर्ज कराने की संभावना है।

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने काफी देर अपनी बात रखी और कई सुझाव दिए। उनके सुझावों में यह भी था कि समिति को सामुदायिक सेवा को परिभाषित करना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि सदस्यों को असहमति पत्र देने के लिए दो दिन के बजाय तीन दिन का समय मिलना चाहिए, हालांकि समिति 48 घंटे की समय सीमा पर अडिग है।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी जैसे कुछ विपक्षी सदस्यों ने पहले ही लिखित में अपनी असहमति दर्ज करा दी है, वहीं, कुछ अन्य के अगले दो दिनों में असहमति पत्र सौंपने की संभावना है।

सूत्रों का कहना है कि समिति विधेयकों को दिए गए हिंदी नामों को लेकर अडिग है और दयानिधि मारन सहित कुछ विपक्षी सदस्यों के उन सुझावों को नजरअंदाज कर दिया है कि उनका अंग्रेजी संस्करण भी होना चाहिए।

औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों में पूरी तरह से बदलाव की पैरवी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को बदलने के लिए तीन विधेयक पेश किए थे।

सदन ने 11 अगस्त को पेश किए जाने के बाद इन विधेयकों को पड़ताल के लिए संसदीय समिति के पास भेज दिया था और तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा था।

इस 30 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष भाजपा सांसद बृजलाल हैं।

सूत्रों ने कहा कि समिति ने लापरवाही के कारण होने वाली मौतों पर और अधिक सख्त रुख अपनाने की सिफारिश की है, क्योंकि ऐसी शिकायत रही है कि मौजूदा कानून बहुत नरम है।

समिति ने लोक सेवकों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने के दोषी लोगों की सजा में कमी का भी प्रस्ताव दिया है।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 353 में अधिकतम दो साल की जेल की सजा का प्रावधान है और समिति इसे घटाकर एक साल करने की मांग कर सकती है। इस कानून का इस्तेमाल अक्सर विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ किया जाता है और समिति के कई सदस्यों का मानना ​​है कि आम प्रदर्शनकारियों के साथ नरमी से पेश आना चाहिए।

समिति ने अन्य सिफारिशों के बीच लिंग-तटस्थ व्यभिचार कानून और पुरुषों, महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के बीच गैर-सहमति वाले यौन संबंधों के लिए दंडात्मक उपायों का समर्थन किया है।

हक

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