देश की खबरें | अभिभावकों, शिक्षकों ने पीटीएम में छात्रों की शैक्षणिक, भावनात्मक आवश्यकताओं पर चर्चा की
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नयी दिल्ली, दो अप्रैल दिल्ली के 1,000 सरकारी विद्यालयों में शनिवार को हुई अभिभावकों एवं शिक्षकों की मुलाकात (पीटीएम) के दौरान कोविड-19 के बाद के दौर में छात्रों की शैक्षणिक एवं भावनात्मक जरूरतों पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया।
दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में पूरी तरह से ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद से यह पहली पीटीएम है।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, ‘‘वैश्विक महामारी के कारण स्कूल करीब दो साल बंद रहे। इससे न केवल हमारे छात्रों की शिक्षा प्रभावित हुई है, बल्कि उनकी सोचने-समझने और खुश रहने की क्षमता पर भी असर हुआ है। अब इसकी भरपाई करने का समय आ गया है। अभिभावकों और शिक्षकों के संयुक्त प्रयासों से छात्रों की मदद होगी, जिससे वे वैश्विक महामारी के बाद की स्थिति से बेहतर तरीके से निपट सकेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 के दौरान लागू लॉकडाउन में स्कूल बंद रहे और छात्र अपने घरों के भीतर ही रह रहे थे। यहां तक कि शिक्षक भी अभिभावकों से अधिकतर समय डिजिटल माध्यम से ही मिल पाए। व्यापक स्तर पर की गई आमने-सामने की इस पीटीएम में अभिभावकों को शिक्षकों के साथ बिना किसी हिचकिचाहट के खुलकर अपनी चिंताएं साझा करने का अवसर मिला।’’
सिसोदिया ने कहा कि शिक्षक अपने बच्चों से जुड़े माता-पिता के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए हमेशा उपलब्ध हैं और महामारी के कारण योग्यता में आए अंतर को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह पीटीएम महामारी से उबरने की दिल्ली सरकार की दो-चरणीय योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कोविड-19 के कारण योग्यता में पैदा हुई खाई को पाटना, छात्रों को बुनियादी साक्षरता एवं कौशल हासिल करने के लिए तैयार करना और उनके भावनात्मक कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना है।
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