विदेश की खबरें | पाकिस्तान के असंतुष्टों ने शीर्ष अदालत के फैसले का किया स्वागत

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वाशिंगटन, आठ अप्रैल पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने देश के उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें उसने अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने के नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी के विवादास्पद फैसले को रद्द कर दिया।

शीर्ष अदालत ने नेशनल असेंबली को बहाल करने का आदेश देते हुए कहा कि संसद भंग करने और चुनाव कराने का प्रधानमंत्री इमरान खान का कदम ‘‘असंवैधानिक’’ था।

पाकिस्तानियों के एक लोकतंत्र समर्थक संगठन, साउथ एशियन्स अगेंस्ट टेररिज्म एंड फॉर ह्यूमन राइट्स (साथ) ने कहा कि पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने पाकिस्तान के संविधान को बरकरार रखते हुए इतिहास में अपना नाम सही के साथ दर्ज कराया है।

संगठन ने कहा कि शीर्ष अदालत का यह फैसला एक सकारात्मक कदम है, साथ ही यह भी जरूरी है कि लोगों के ऐसे बच निकलने की प्रथा भी खत्म हो।

‘साथ’ में सांसद अफरासियाब खट्टक, सांसद मोहसिन डावर, पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी और कामरान शफी, ‘डेली टाइम्स’ के पूर्व संपादक रशीद रहमान, स्तंभकार मोहम्मद तकी, पत्रकार ताहा सिद्दीकी, गुल बुखारी तथा मारवी सिरमद और कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल, ताहिरा जबीन, शहजाद इरफान और फरहान कागजी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इमरान खान के कार्यकाल में, ‘‘ संविधान, अर्थव्यवस्था, विदेशी मामलों और शासन को कम महत्व दिया गया।’’

उन्होंने कहा कि विपक्ष को लगातार निशाना बनाया गया। असंतुष्ट पत्रकारों, राजनेताओं, राजनयिकों और बुद्धिजीवियों ने अपने कुछ सहयोगियों के उत्पीड़न का भी हवाला दिया। इनमें से कुछ डर के कारण निर्वासन में रहते हैं।

नेशनल असेंबली के एक सदस्य अली वजीर, जो अभी जेल में हैं। उनके बारे में बात करते हुए ‘साथ’ ने एक बयान में कहा, ‘‘ पूरी तरह से झूठे आरोप के कारण वह नौ महीने से जेल में हैं, जिसके लिए कोई सबूत पेश नहीं किए गए और संविधान की भावना के खिलाफ जाते हुए जमानत देने से भी इनकार कर दिया गया। ’’

‘साथ’ ने उम्मीद जतायी कि पाकिस्तान अब निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव कराएगा और नई सरकार बलूचिस्तान, खैबर-पख्तूनख्वा तथा गिलगित-बाल्टिस्तान में दमन के शिकार समुदायों पर तत्काल ध्यान देगी और उन्हें राहत देगी।

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