एजेंसी न्यूज

अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिये पाक ने आयोग को पुनर्गठित किया

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बृहस्पतिवार को कहा था कि धार्मिक अल्पसंख्यक देश के संविधान के तहत प्रदत्त धार्मिक आजादी का लाभ उठा पाने में अक्षम हैं।

अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिये पाक ने आयोग को पुनर्गठित किया

इस्लामाबाद, 12 मई पाकिस्तान सरकार ने हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा और देश में अंतर-धर्म सद्भाव के लिए एक आयोग का पनर्गठन किया है। कुछ दिनों पहले ही आई मानवाधिकार की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि 2019 में विवादास्पद ईशनिंदा कानून के तहत अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और उनका जबरन धर्मांतरण जारी है।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बृहस्पतिवार को कहा था कि धार्मिक अल्पसंख्यक देश के संविधान के तहत प्रदत्त धार्मिक आजादी का लाभ उठा पाने में अक्षम हैं।

उसने कहा, “पंजाब में अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय को कुछ धार्मिक स्थलों पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। सिंध और पंजाब प्रांत में हिंदू और ईसाई समुदायों की तरफ से जबरन धर्मांतरण की शिकायतें आना जारी है।”

धार्मिक मामलों एवं अंतर-धर्म सद्भाव मंत्रालय ने सोमवार को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के गठन की घोषणा की।

मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक आयोग में छह आधिकारिक और 12 गैर-आधिकारिक सदस्य होंगे।

आयोग के सदस्यों की संख्या पहले स्पष्ट नहीं थी क्योंकि यह निष्क्रिय था।

आयोग देश में शांति और अंतर-धर्म सद्भाव को बढ़ावा देने के लिये एक राष्ट्रीय नीति के विकास के वास्ते एक प्रस्ताव तैयार करेगा।

डान अखबार की खबर के मुताबिक आयोग उन कानूनों/ नीतियों में संशोधन का प्रस्ताव देगा जो कथित तौरपर धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभावपूर्ण हैं और वो कदम सुझाएगा जिससे जीवन के सभी क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों की अधिकतम व प्रभावी भागीदारी, त्योहार और सांस्कृतिक उत्सवों को मनाने का अधिकार सुनिश्चित हो।

आयोग अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायतों और उनके सदस्यों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रतिवेदनों पर भी विचार करेगा।

पाकिस्तान हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष और सिंध प्रांत में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता चेला राम केवलानी इस आयोग के अध्यक्ष होंगे।

केवलानी के अलावा पुनर्गठित आयोग में जयपाल छाबड़िया और विष्णू राजा कवि भी हिंदू सदस्य होंगे। जयपाल कराची के सामाजिक कार्यकर्ता हैं जबकि विष्णू सिंध प्रांत के पूर्व नौकरशाह हैं।

आयोग में दो सिख सदस्य सरूप सिंह और मीमपाल सिंह भी शामिल किये गए हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)

(The above story first appeared on LatestLY on May 12, 2020 06:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).