इस्लामाबाद, सात जुलाई पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के विश्वासपात्र रह चुके अवान चौधरी ने उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को भंग करने के अनुरोध को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की है।
चौधरी ने इमरान की गिरफ्तारी के विरोध में नौ मई को देश के कई हिस्सों में हुई अभूतपूर्व हिंसा में पूर्व प्रधानमंत्री की कथित संलिप्तता का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है।
चौधरी अब नव-गठित इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (आईपीपी) का हिस्सा हैं। उन्होंने शीर्ष अदालत में बृहस्पतिवार को दायर संवैधानिक याचिका में पीटीआई प्रमुख इमरान खान और पार्टी अध्यक्ष परवेज इलाही को प्रतिवादी नामित किया है।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक, इस याचिका में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अलावा कानून एवं आंतरिक मामलों के मंत्री सहित कई अन्य लोगों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
चौधरी ने दलील दी है कि पीटीआई प्रमुख सरकारी संस्थानों, न्यायपालिका और सैन्य एवं नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमलों में शामिल थे और उन्होंने न केवल बुनियादी मानवाधिकारों, बल्कि संविधान का भी उल्लंघन किया।
आईपीपी नेता ने अपनी याचिका में कहा, “पीटीआई, उसके प्रमुख और पदाधिकारियों के कृत्य, न्यायपालिका के खिलाफ उनके नफरत भरे भाषण और रक्षा प्रतिष्ठानों एवं सार्वजनिक संपत्तियों में आगजनी तथा लूटपाट की घटनाएं असंवैधानिक हैं।”
नौ मई की घटनाओं का जिक्र करते हुए चौधरी ने कहा कि पीटीआई समर्थकों ने सरकारी संस्थानों के खिलाफ साजिश रची, लाहौर में कोर कमांडर के आवास को आग के हवाले किया और सार्वजनिक संपत्ति में लूटपाट को अंजाम दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पीटीआई प्रमुख और उनकी पार्टी ने सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमला करके और देश तथा उसके संस्थानों की अखंडता एवं गरिमा के खिलाफ नफरत भरे भाषण देकर समाज के ताने-बाने को नष्ट किया।
चौधरी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र की अवधारणा और सरकार के संसदीय स्वरूप को चुनाव अधिनियम में शामिल किया गया है, लेकिन पीटीआई ने उस अवधारणा और अधिनियम का गंभीर उल्लंघन किया।
याचिका के साथ रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल को लिखे एक पत्र की एक प्रति भी संलग्न की गई है। इस पत्र में 70 वर्षीय इमरान द्वारा “सशस्त्र बलों के वरिष्ठतम अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों का जिक्र किया गया है।”
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