विदेश की खबरें | पाकिस्तान को उम्मीद भारत सिंधु जल संधि को ‘सद्भावना’ से लागू करेगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को उम्मीद जताई कि भारत सिंधु जल संधि को 'सद्भावना' से लागू करेगा। इससे पहले भारत ने कहा था कि कश्मीर में किशनगंगा और रतले पनबिजली परियोजनाओं को लेकर हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत में ‘अवैध’ कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए उसे मजबूर नहीं किया जा सकता है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इस्लामाबाद, छह जुलाई पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को उम्मीद जताई कि भारत सिंधु जल संधि को 'सद्भावना' से लागू करेगा। इससे पहले भारत ने कहा था कि कश्मीर में किशनगंगा और रतले पनबिजली परियोजनाओं को लेकर हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत में ‘अवैध’ कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए उसे मजबूर नहीं किया जा सकता है।

इस्लामाबाद में, विदेश कार्यालय ने कहा कि स्थायी मध्यस्थता अदालत ने "अपने अधिकार क्षेत्र को बरकरार रखा है और कहा है कि वह अब विवाद में मुद्दों को हल करने के लिए आगे बढ़ेगा।"

विदेश कार्यालय ने कहा है कि सिंधु जल संधि पानी बंटवारे पर पाकिस्तान और भारत के बीच एक मूलभूत समझौता है, और इस्लामाबाद उसके विवाद निपटान तंत्र सहित संधि के कार्यान्वयन के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

बयान में कहा गया है, “ हमें उम्मीद है कि भारत भी इस संधि को सद्भावना से लागू करेगा।”

इससे पहले भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि कश्मीर में किशनगंगा और रतले पनबिजली परियोजनाओं को लेकर स्थायी मध्यस्थता अदालत में ‘अवैध’ कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए उसे मजबूर नहीं किया जा सकता है।

दरअसल, हेग स्थित मध्यस्थता अदालत ने फैसला दिया है कि उसके पास पनबिजली के मामले पर नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच विवाद पर विचार करने का ‘अधिकार’ है।

भारत का कहना रहा है कि वह स्थायी मध्यस्थता अदालत में पाकिस्तान द्वारा शुरू की गई कार्यवाही में शामिल नहीं होगा, क्योंकि सिंधु जल संधि की रूपरेखा के तहत विवाद का पहले से ही एक निष्पक्ष विशेषज्ञ परीक्षण कर रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत को अवैध और समान्तर कार्यवाहियों को मानने या उनमें हिस्सा लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है जो संधि में उल्लेखित नहीं हैं।

भारत ने संधि के विवाद निवारण तंत्र का पालन करने से पाकिस्तान के इनकार के मद्देनजर इस्लामाबाद को जनवरी में नोटिस जारी कर सिंधु जल संधि की समीक्षा और उसमें संशोधन की मांग की थी।

यह संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में सीमा-पार नदियों के संबंध में दोनों देशों के बीच हुई थी।

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