विदेश की खबरें | पाकिस्तान: हिंसा के आरोपियों के खिलाफ मुकदमा सैन्य अदालतों में चलाने के निर्णय को कैबिनेट की मंजूरी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पाकिस्तान के मंत्रिमंडल ने प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सैन्य अदालतों द्वारा सुनवाई किये जाने के राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के फैसले का शनिवार को समर्थन किया।
इस्लामाबाद, 20 मई पाकिस्तान के मंत्रिमंडल ने प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सैन्य अदालतों द्वारा सुनवाई किये जाने के राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के फैसले का शनिवार को समर्थन किया।
पूर्व प्रधानमंत्री एवं पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद 9 मई को प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर सैन्य और नागरिक भवनों और वाहनों को आग लगा दी थी। हिंसा में 10 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हो गए थे।
70 वर्षीय खान के हजारों समर्थकों को उस हिंसा में गिरफ्तार किया गया जिसे पाकिस्तान की सेना ने देश के इतिहास में "काला दिन" बताया।
राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) ने बुधवार को आयोजित एक बैठक में इस बात पर सहमति जतायी कि सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सेना अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाए।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार ने शनिवार को बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ सैन्य अदालतों में मामला चलाने को मंजूरी दे दी। यह मंजूरी ऐसे समय दी गई जब कुछ दिनों पहले एनएससी और कोर कमांडर सम्मेलन में ऐसे व्यक्तियों को न्याय के कठघरे में लाने की प्रतिबद्धता जतायी गई थी।
नौ मई को अर्धसैनिक बल रेंजर्स द्वारा इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) परिसर से खान को गिरफ्तार किये जाने के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। खान के समर्थक पूरे पाकिस्तान में हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ की और यहां तक कि रावलपिंडी स्थित जनरल मुख्यालय और लाहौर कोर कमांडर के आवास पर भी हमला किया गया।
हिंसा पीटीआई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के बाद शुरू हुई।
एक कैबिनेट मंत्री ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर समाचारपत्र ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ को बताया कि कोई नयी सैन्य अदालत स्थापित नहीं की जाएगी और आरोपियों के खिलाफ सुनवायी ‘‘विशेष स्थायी अदालतों’’ में की जाएगी जो पहले से ही सैन्य अधिनियम के तहत काम कर रही हैं।
हालांकि, जानेमाने वकील एवं सेना से संबंधित मामलों के विशेषज्ञ, कर्नल (सेवानिवृत्त) इनामुर रहीम ने कहा कि रक्षा मंत्रालय या चीफ आफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) को विशेष स्थायी अदालतों की स्थापना करने या फिर से इन्हें बहाल करने के लिए औपचारिक रूप से एक अधिसूचना जारी करनी होगी।
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