विदेश की खबरें | पाक: प्रधान न्यायाधीश के अधिकार में कटौती करने संबंधी विधेयक पर संसदीय कार्यवाही का रिकॉर्ड तलब
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने सरकार को उस विधेयक के संबंध में संसदीय कार्यवाही का रिकॉर्ड पेश करने का मंगलवार को निर्देश दिया, जिसका उद्देश्य प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय को मामलों का स्वत: संज्ञान लेने और मामलों की सुनवाई के लिए न्यायाधीशों की एक समिति बनाने की शक्तियों से वंचित करना है।
इस्लामाबाद, दो मई पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने सरकार को उस विधेयक के संबंध में संसदीय कार्यवाही का रिकॉर्ड पेश करने का मंगलवार को निर्देश दिया, जिसका उद्देश्य प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय को मामलों का स्वत: संज्ञान लेने और मामलों की सुनवाई के लिए न्यायाधीशों की एक समिति बनाने की शक्तियों से वंचित करना है।
न्यायपालिका और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच संबंधों में तब से खटास आ गई है, जब से सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नेतृत्व वाली सरकार ‘उच्चतम न्यायालय (प्रैक्टिस एवं प्रक्रिया) विधेयक- 2023’ पर जोर दे रही है।
इस विधेयक को शुरू में संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था।
राष्ट्रपति ने हालांकि यह कहते हुए इसे वापस भेज दिया था कि प्रस्तावित कानून ‘‘संसद के अधिकार क्षेत्र के दायरे से बाहर’’ है।
इस विधेयक के प्रावधानों में मामलों का स्वत: संज्ञान लेने एवं पीठों के गठन के प्रधान न्यायाधीश के अधिकारों में कटौती शामिल हैं।
विधेयक को हालांकि 10 अप्रैल को संसद के संयुक्त सत्र में कुछ संशोधनों के साथ फिर से पारित किया गया था और राष्ट्रपति को भेजा गया था।
संसद द्वारा विधेयक पारित किये जाने के तीन दिन बाद उच्चतम न्यायालय की आठ सदस्यीय एक पीठ ने एक आदेश जारी किया, जिसके जरिये सरकार द्वारा इस विधेयक को लागू करने से रोक लगाई गई।
प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई की और विधेयक के संबंध में संसदीय कार्यवाही की प्रतियां उपलब्ध कराने के अटॉर्नी जनरल को निर्देश दिये।
सुनवाई के दौरान, प्रधान न्यायाधीश बंदियाल ने कहा कि यह कानून पाकिस्तान में अपनी तरह का पहला ऐसा कानून था, जिसने न्यायपालिका को प्रभावित किया।
उन्होंने एक न्यायाधीश को खंडपीठ से हटाने संबंधी याचिका खारिज कर दी, क्योंकि उनके खिलाफ एक शिकायत लंबित है। प्रधान न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई के लिए एक पूर्ण अदालत बनाने की एक अन्य याचिका को भी खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति बंदियाल ने राजनीतिक दलों की भी आलोचना करते हुए कहा कि वे अपने अनुकूल निर्णय चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र न्यायपालिका संविधान की एक मुख्य विशेषता है।
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