देश की खबरें | पहलगाम हमला : उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन, मुस्लिमों ने काली पट्टी बांध कर जताया विरोध

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के खिलाफ शुक्रवार को पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

लखनऊ, 25 अप्रैल कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के खिलाफ शुक्रवार को पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

कई हिंदू संगठनों और व्यापार निकायों ने बंद और रैलियों के माध्यम से अपना विरोध जताया, जबकि मुस्लिम समूहों ने प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया और इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की।

मुजफ्फरनगर के खतौली कस्बे में, मुसलमानों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए जुमे की नमाज के दौरान काली पट्टी बांधी।

शाह इस्लामिक लाइब्रेरी में, कारी मोहम्मद खालिद के नेतृत्व में एक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। खालिद ने केंद्र सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। विरोध में खतौली में सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे।

बरेली में भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त की गईं, जहां इस्लामी विद्वान अल्लामा तौकीर रजा खान ने दरगाह आला हजरत में एक सभा को संबोधित करते हुए इस हमले को भारत में सांप्रदायिक अशांति फैलाने का एक सुनियोजित प्रयास करार दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह हिंदुओं और मुसलमानों को विभाजित करने की एक जानबूझकर की गई साजिश थी। हम हर भारतीय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहने की अपील करते हैं।’’

खान ने स्थानीय कश्मीरी मुसलमानों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने हमले के दौरान लोगों की जान बचाने में मदद की और इसे भारत की मानवता की साझा विरासत का प्रमाण बताया।

गाजियाबाद में, उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के आह्वान पर शहर के बाजार बंद रहे। व्यापार मंडल के अध्यक्ष गोपी चंद के नेतृत्व में आयोजित एक विरोध मार्च में व्यापारियों ने ‘‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’’ लिखी तख्तियां ले रखी थीं। इस मार्च का समापन पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाली एक अर्थी को प्रतीकात्मक रूप से जलाने के साथ हुआ।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद अतुल गर्ग और शहर के विधायक संजीव शर्मा ने चौपला मंदिर बाजार में एक जनसभा को संबोधित किया। गर्ग ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने और पाकिस्तानी राजनयिकों की संख्या सीमित करने सहित केंद्र द्वारा उठाए गए कूटनीतिक कदमों को रेखांकित किया।

शर्मा ने पहलगाम की घटना को ‘‘भारत पर ही हमला’’ बताया।

सोनभद्र में भी कई जुलूस निकाले गए। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने रामलीला मैदान और बभनी बाजार में रैलियां निकालीं, जहां स्थानीय व्यापारियों ने भी समर्थन में अपनी दुकानें बंद रखीं।

रामराज सिंह गोंड और हाजी फरीद अहमद के नेतृत्व में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा निकाले गए मोमबत्ती जुलूस में लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए और केंद्र सरकार के साथ एकजुटता व्यक्त की।

गोंड ने कहा, ‘‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और राहुल गांधी ने इस मामले में सरकार को पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया है।’’

कन्नौज में, मुख्य शहर और सराय मीरा और मकरंद नगर जैसे आसपास के इलाकों में अभूतपूर्व बंद देखा गया। यहां तक कि छोटी-छोटी दुकानें भी बंद रहीं। सनातन सेवा संघ, विहिप, बजरंग दल और कई व्यापार संघों द्वारा दोपहिया वाहनों पर निकाली गई विरोध रैली फूलमती देवी मंदिर से शुरू हुई।

बार एसोसिएशन के वकीलों ने बस अड्डे पर पाकिस्तान का पुतला भी जलाया।

झांसी में संघर्ष सेवा समिति के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने एलीट चौराहे पर प्रदर्शन किया, आतंकवाद का पुतला जलाया और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।

समिति के अध्यक्ष डॉ. संदीप सरावगी ने हत्याओं को ‘‘भारतीय धर्मनिरपेक्षता पर सीधा हमला’’ और ‘‘धार्मिक आतंकवाद का सबसे बुरा रूप’’ बताया।

हापुड़ में चैंबर ऑफ कॉमर्स के व्यापारियों ने मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।

एक अन्य बैठक में वक्ताओं ने हिंदुओं पर लक्षित हमलों पर चिंता व्यक्त की और प्रशासन से व्यापारियों को आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार रखने की अनुमति देने का आग्रह किया।

प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में पूरे दिन आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हुए। पुतले जलाए गए, मृतकों के लिए प्रार्थना की गई। हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की।

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