देश की खबरें | उड़ीसा उच्च न्यायालय ने आईपीएस अधिकारी गजभिए के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उड़ीसा उच्च न्यायालय ने आईपीएस अधिकारी सतीश कुमार गजभिए के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया। मल्कानगिरी पुलिस अधीक्षक के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को नक्सल विरोधी अभियान के लिए इनाम राशि का कथित भुगतान नहीं किए जाने के मामले में गजभिए के खिलाफ कार्रवाई की गयी थी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

कटक, नौ दिसंबर उड़ीसा उच्च न्यायालय ने आईपीएस अधिकारी सतीश कुमार गजभिए के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया। मल्कानगिरी पुलिस अधीक्षक के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को नक्सल विरोधी अभियान के लिए इनाम राशि का कथित भुगतान नहीं किए जाने के मामले में गजभिए के खिलाफ कार्रवाई की गयी थी।

उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य सरकार को एक महीने के भीतर 2002 बैच के आईपीएस अधिकारी गजभिए को सभी पदोन्नति देने और स्थगित की गयी अन्य सुविधाएं बहाल करने का निर्देश दिया।

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न्यायमूर्ति संजू पांडा और न्यायमूर्ति एस के पाणिग्रही की पीठ ने गजभिए के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया। पीठ ने कहा, ‘‘न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों के अनुरूप वैधानिक तरीके से कार्रवाई नहीं की गयी और इस संबंध में आदेश अमान्य हैं।’’

वर्ष 2015 में गृह विभाग ने अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के कथित उल्लंघन के लिए पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी।

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मल्कानगिरी के एसपी के तौर पर गजभिए ने 2007 में माओवादी श्रीरामुलू श्रीनिवास को गिरफ्तार करने वाले जिले के पुलिसकर्मियों के बीच इनाम की रकम कथित तौर पर नहीं वितरित की थी।

आंध्रप्रदेश सरकार ने श्रीनिवास पर पांच लाख रुपये इनाम की घोषणा की थी जिसे बाद में बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया गया था।

तीन पुलिसकर्मियों द्वारा इनामी राशि का भुगतान नहीं मिलने की शिकायत के बाद नवंबर 2015 में गजभिए के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गयी थी। अनुशासनात्मक कार्रवाई को चुनौती देते हुए उन्होंने राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण (एसएटी) में इसे चुनौती दी थी। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) में मामला खारिज होने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

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