ताजा खबरें | विपक्ष ने संस्थानों में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ने, स्वतंत्र कामकाज प्रभावित होने का आरोप लगाया
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. कांग्रेस और द्रमुक सहित कुछ विपक्षी दलों ने चार्टर्ड एकाउंटेंट, संकर्म लेखापाल और कम्पनी सचिव से संबंधित व्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत बताते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि इनके अनुशासन तंत्र को सुदृढ़ करने के नाम पर सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाने और संस्थानों के स्वतंत्र कामकाज को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
नयी दिल्ली, 29 मार्च कांग्रेस और द्रमुक सहित कुछ विपक्षी दलों ने चार्टर्ड एकाउंटेंट, संकर्म लेखापाल और कम्पनी सचिव से संबंधित व्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत बताते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि इनके अनुशासन तंत्र को सुदृढ़ करने के नाम पर सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाने और संस्थानों के स्वतंत्र कामकाज को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि समय के साथ किसी भी कानून में संशोधन जरूरी होता है तथा सरकार इन संस्थानों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए ठोस तंत्र बनाना चाहती है और इससे संस्थाओं की स्वायत्तता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
लोकसभा में ‘चार्टर्ड एकाउंटेंट, लागत एवं संकर्म लेखापाल और कम्पनी सचिव (संशोधन) विधेयक, 2021’ पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस के डा. एम के विष्णु प्रसाद ने कहा कि रचनात्मकता महत्वपूर्ण होती है लेकिन लेखा के क्षेत्र में नहीं।
उन्होंने कहा कि भारतीय सनदी लेखा संस्थान (आईसीएआई) की स्थापना 1949 में हुई थी, यह कंपनी मामलों के मंत्रालय के तहत स्वायत्त निकाय है लेकिन इसे वित्त पोषण प्राप्त नहीं है।
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि सरकार इनसे संबंधित अदालती मामलों का तेजी से निपटारा करने का मार्ग प्रशस्त करना चाहती है लेकिन इन कदमों से सरकार का हस्तक्षेप बढ़ेगा।
उन्होंने संस्थान में अनुशासन समिति का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इसमें अपने नामित लोगों की संख्या बढ़ाने जा रही है जिससे इसका स्वतंत्र कामकाज प्रभावित होगा।
प्रसाद ने कहा कि सरकार सभी चीजों को स्वतंत्र बनाने की बात करती है लेकिन हर संस्था में उसका हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के सुभाष चंद्र बहेड़िया ने कहा कि समय के साथ किसी भी कानून में संशोधन जरूरी होता है और इसी को ध्यान में रखते हुए यह विधेयक लाया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार इन संस्थानों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए ठोस तंत्र बनाना चाहती है और इससे संस्थाओं की स्वायत्तता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
उन्होंने छोटे निवेशकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को निवेशक सुरक्षा विधेयक लाना चाहिए। बहेड़िया ने कहा कि देश में कई अदालतों में छोटे निवेशकों को चपत लगाये जाने के मामले चल रहे हैं, ऐसे में इन निवेशकों के हितों पर ध्यान देना जरूरी है।
वहीं, द्रमुक के ए राजा ने कहा कि इस विधेयक के कुछ प्रावधान अच्छे हैं लेकिन कई ऐसे प्रावधान हैं जो आशंका उत्पन्न करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके कुछ प्रावधानों से लगता है कि सरकार का छिपा एजेंडा है।
राजा ने कहा कि इस विधेयक पर संसद की स्थायी समिति ने विचार किया था लेकिन इसकी सिफारिशों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस विधेयक के माध्यम से चार्टर्ड एकाउंटेंट्स अधिनियम 1949, लागत एवं संकर्म लेखापाल अधिनियम, 1959 तथा कम्पनी सचिव अधिनियम, 1980 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।
इसमें अनुशासन निदेशालयों की शिकायतों एवं सूचना संबंधी क्षमताओं को बढ़ाकर अनुशासन तंत्र को सुदृढ़ करने तथा संस्थानों के सदस्यों के विरूद्ध मामलों के त्वरित निपटान के लिये समय-सीमा निर्धारित करने का उपबंध किया गया है।
इसके तहत संस्थानों के प्रशासनिक एवं अनुशासनिक भागों के बीच हितों के द्वंद्व से निपटने संबंधी प्रावधान भी किया गया है। इसमें शुल्क को नियत करने के लिये संबंधित संस्थाओं की परिषदों को स्वायत्तता का उपबंध करने की बात कही गई है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)