देश की खबरें | पीएमएलए मामले में केवल कानूनी मुद्दों पर विचार किया जाएगा : न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शक्तियों को बरकरार रखने के 2022 के फैसले पर पुनर्विचार में केवल कानूनी मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
नयी दिल्ली, 20 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शक्तियों को बरकरार रखने के 2022 के फैसले पर पुनर्विचार में केवल कानूनी मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
अदालत ने इस पर गौर करने का फैसला किया है कि क्या पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी और धन शोधन में शामिल संपत्तियों को कुर्क करने की ईडी की शक्तियों को बरकरार रखने वाले उसके पिछले साल के फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। अदालत ने यह भी कहा कि वह व्यक्तिगत मामलों पर गौर नहीं करेगी।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की विशेष पीठ ने एक व्यक्ति द्वारा दायर अंतरिम अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह बात कही, जिसे ईडी ने कोयला परिवहन और स्टील, लोहे के छर्रे के उत्पादन के संबंध में कथित उगाही से संबंधित धन शोधन मामले में तलब किया है।
न्यायमूर्ति कौल की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने कहा, ‘‘जब मामला (18 अक्टूबर को) उठाया गया था, तो हमने कहा था कि हम केवल कानूनी मुद्दों पर विचार करेंगे, व्यक्तिगत मुद्दों पर नहीं।’’
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी के वकील को सूचित किए बिना मामले को 16 अक्टूबर को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए उल्लेख किए जाने पर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि मामले के एक आरोपी ने प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को रद्द करने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में एक अलग याचिका दायर की थी और वह याचिका एक अन्य पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी। मेहता ने कहा कि याचिका वापस ले ली गई है।
मेहता ने कहा कि विशेष पीठ के समक्ष दायर अर्जी में जो अनुरोध किया है, वह समान है। मेहता ने कहा, ‘‘इसका इस तरह जिक्र नहीं किया जाना चाहिए। यह जिक्र हमारी जानकारी के बिना किया गया।’’
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि उसे ईडी ने तलब किया था लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उसे गवाह के रूप में बुलाया गया था या आरोपी के रूप में। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने दंडात्मक कार्रवाई से राहत की मांग की है। मेहता ने कहा कि जांच एजेंसी ने अदालत में एक हलफनामा भी दायर किया है।
हलफनामे में कहा गया कि ईडी को अर्जी को सूचीबद्ध किये जाने के बारे में बृहस्पतिवार को पता चला जब पूरक वाद सूची अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई। इसमें कहा गया कि यह प्रथम दृष्टया एओआर (एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड) का नाम डालकर न्यायिक रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ का मामला प्रतीत होता है ताकि यह पता चले कि उन्हें सूचित किया गया था या वह उपस्थित थे...यदि ऐसा है तो यह जालसाजी है और इसकी जांच कराने तथा इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
हलफनामे में कहा गया कि ईडी के एओआर न तो मुख्य कार्यवाही में उपस्थित हुए थे और न ही वह 16 अक्टूबर को उपस्थित थे। पीठ ने उचित निर्देश के लिए मामले को प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के समक्ष रखने को कहा।
विशेष पीठ ने बुधवार को कहा था कि वह 22 नवंबर को इस बात पर विचार करेगी कि पिछले साल 27 जुलाई के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है या नहीं।
पिछले साल के अपने फैसले में, शीर्ष अदालत ने पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी, धन शोधन में शामिल संपत्ति की कुर्की, तलाशी और जब्ती की ईडी की शक्तियों को बरकरार रखा था।
पिछले साल अगस्त में, शीर्ष अदालत अपने जुलाई 2022 के फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हुई थी और कहा था कि ‘‘प्रथम दृष्टया’’ दो पहलुओं-ईसीआईआर प्रदान नहीं करना और बेगुनाही की धारणा को उलटना- पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)