देश की खबरें | संसद हमले की बरसी पर नायडू ने कहा : आतंकी संगठन मानवजाति को अंधयुग में ले जाना चाहते हैं
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नयी दिल्ली, 13 दिसंबर उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने रविवार को कहा कि 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए हमले की बरसी आतंकवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक आकांक्षाओं के प्रति उसके विरोध के खतरे की याद दिलाती है।
नायडू ने फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट में कहा कि संसद की सुरक्षा कर रहे सतर्क और वीर जवानों ने हमले को नाकाम कर दिया। आतंकवादियों की गोलीबारी में आठ सुरक्षा कर्मियों और एक माली ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। त्वरित और वीरता से दी गई प्रतिक्रिया में सभी पांच आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया।
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उन्होंने कहा कि उस हमले के दौरान सीआरपीएफ की बहादुर कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी सबसे आगे थी जिन्होंने आतंकवादियों को पहले देखा और संसद परिसर में उनकी गतिविधियों पर नजर रखे रहीं तथा अपने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देती रहीं।
उपराष्ट्रपति ने कहा, " उनकी सूचना आतंकवादियों के विरुद्ध त्वरित और कारगर कार्रवाई में महत्वपूर्ण थीं। वह स्वयं आतंकवादियों की गोलियों का सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं और अपने पीछे शौर्य, कर्तव्य निष्ठा एवं राष्ट्र निष्ठा का एक अनुकरणीय आदर्श छोड़ गईं। "
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राज्यसभा के सभापति नायडू ने कहा, " इस मौके पर मैं आठों सुरक्षा कर्मियों और माली की वीरता और त्याग को सादर नमन करता हूं। कृतज्ञ राष्ट्र आपके त्याग को सदैव आदरपूर्वक याद करेगा।"
उन्होंने कहा कि 2001 का साल लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था के केंद्रों पर घृणित हमलों के साथ खत्म हुआ।
नायडू ने कहा, " दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले लोकतांत्रिक देश, भारत और अमेरिका पर हमले हुए। उस साल सितंबर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर और दिसंबर में भारतीय संसद पर हमले हुए जिसने आतंकवादी संगठनों के एजेंडा को उजागर कर दिया। बीते दशकों में अलग अलग तरह के कई ऐसे हमले मानवजाति ने देखे हैं। "
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवादी संगठनों का एकमात्र एजेंडा दुनिया के लोकतांत्रिक और आर्थिक ताने-बाने को बाधित करना एवं मानवजाति को अंधयुग में ले जाना है।
उन्होंने कहा कि प्रभावी और सामूहिक वैश्विक कार्रवाइयों के जरिए ऐसी नापाक साजिशों को खत्म करना चाहिए।
नायडू ने कहा कि संकीर्ण लक्ष्यों के लिए आतंकवाद को राज्य की नीति के तौर पर सहायता देने वाले राज्य एवं राज्य इतर तत्वों को विश्व समुदाय द्वारा अलग-थलग किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा, " भारत आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समझौते को अपनाने के एक प्रस्ताव पर जोर देता रहा है। इस संबंध में अलग-अलग महाद्वीपों के कई देशों ने भारत का समर्थन किया है जबकि कुछ हैं जो संकीर्ण भू-राजनीतिक और आर्थिक कारणों से आतंकवाद के बड़े खतरों से बेखबर हैं।"
उन्होंने कहा कि उन्हें यह एहसास होना चाहिए कि अगर संयुक्त प्रयास के जरिए आतंकवाद के खतरे को खत्म नहीं किया गया तो अंत में सब को नुकसान होगा।
नायडू ने कहा कि 2001 के संदेश का इस्तेमाल हर नागरिक और देश को आतंकवाद के छुपे हुए खतरे को बताने के लिए करना चाहिए ताकि इसे खत्म करने के लिए एक प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
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