देश की खबरें | सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा का कवच है पुरानी पेंशन योजना: गहलोत

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जयपुर, एक मार्च राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुरानी पेंशन योजना को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा का कवच करार देते हुए उम्मीद जताई है कि राज्य में इसे पुनः लागू करने के उनके निर्णय से भविष्य में अधिक संख्या में प्रतिभाशाली युवा राजकीय सेवा की तरफ आकर्षित होंगे।

गहलोत ने कहा कि नई पेंशन प्रणाली एनपीएस अपने वर्तमान स्वरूप में समस्याग्रस्त है तथा पूरे देश के कर्मचारी पुरानी पेंशन प्रणाली की पुनर्बहाली की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा,'राजस्थान सरकार के कर्मचारियों के हितों की रक्षा तथा सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने एक जनवरी, 2004 के पश्चात राजकीय सेवा में आये सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली को पुनः बहाल करने का निर्णय किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने राज्य विधानसभा में 23 फरवरी, 2022 को अपने बजट भाषण में पुरानी पेंशन प्रणाली को अगले वित्तीय वर्ष से लागू करने की घोषणा की है।'

गहलोत के अनुसार इस निर्णय का न केवल राजस्थान सरकार के, बल्कि सभी राज्यों के कर्मचारियों ने स्वागत किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकारी एवं निजी क्षेत्र के बीच पूर्व में मुख्य अन्तर पेंशन ही था। सरकारी नौकरियों में एक तय सीमा से अधिक वेतनमान नहीं हो सकता परन्तु पेंशन से भविष्य की सुरक्षा के कारण प्रतिभाशाली युवा सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देते थे।’’

उन्होंने कहा कि ऐसा देखने में आया कि नई पेंशन प्रणाली लागू होने के बाद प्रतिभाशाली युवाओं का सरकारी नौकरी की तरफ रुझान कम हो गया था और पुरानी पेंशन प्रणाली को पुनः लागू करने के निर्णय से भविष्य में अधिक संख्या में प्रतिभाशाली युवा राजकीय सेवा की तरफ आकर्षित होंगे।

मुख्यमंत्री ने एक बयान जारी कर कहा है कि कांग्रेस पार्टी तथा राजस्थान की कांग्रेस सरकार अपने लोगों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा प्रदान कराने के अपने कर्तव्य को भली भांति जानते हैं।

उन्होंने कहा कि एक सरकारी कर्मचारी 30-35 वर्षों तक सेवा करता है और सेवानिवृत्ति के पश्चात पेंशन के आधार पर अपना जीवन व्यतीत करता है। प्रत्येक निर्वाचित सरकार का यह कर्तव्य होता है कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसके कर्मचारी सुरक्षा की भावना के साथ जीवन निर्वाह करें ताकि वे भी सुशासन में अपना मूल्यवान योगदान दे सकें।

गहलोत के अनुसार सरकारी कर्मचारियों के सामाजिक-आर्थिक आधार को मजबूती प्रदान करने की दृष्टि से सेंट्रल सिविल सर्विस (पेंशन) नियम 1972 लागू किया गया जिसमें पेंशन/पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी एवं रूपांतरित राशि का प्रावधान किया गया।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से इस पुरानी पेंशन प्रणाली को दिसम्बर, 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने समाप्त कर दिया और उसके स्थान पर 1 अप्रैल, 2004 से नई पेंशन प्रणाली लागू की।

उन्होंने कहा कि नई पेंशन प्रणाली अपने वर्तमान स्वरूप में समस्याग्रस्त है तथा पूरे देश के कर्मचारी पुरानी पेंशन प्रणाली की पुनर्बहाली की मांग कर रहे हैं क्योंकि नई पेंशन प्रणाली कर्मचारियों की वर्तमान और सेवानिवृत्ति पश्चात की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रही है।

गहलोत ने कहा कि पुरानी पेंशन प्रणाली के बारे में यह कहा जाता है कि इससे सरकारों पर वित्तीय भार बढ़ेगा तथा विकास और जनकल्याण के कार्य प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि यह तथ्य समझना जरूरी है कि जब पुरानी पेंशन प्रणाली लागू थी तो उस समय भी देश ने प्रत्येक क्षेत्र में शानदार तरक्की की थी।

उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन प्रणाली के कारण विकास और जनकल्याण के कार्यों में कभी भी कटौती नहीं की गई।

उन्होंने कहा है कि राजस्थान सरकार ने अनेक घटकों को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन प्रणाली को पुनः बहाल किया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार राजस्थान सरकार ने एनपीएस के बावजूद अपनी विकास योजनाओं के साथ कभी भी कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना लागू होने के बाद भी राजस्थान में विकास कार्य निरन्तर जारी रहेंगे और एनपीएस के कारण कर्मचारियों में व्याप्त चिंताओं से राजस्थान सरकार पूरी तरह वाकिफ है।

उन्होंने कहा है कि पुरानी पेंशन प्रणाली के तहत कर्मचारियों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाती है इसलिए राजस्थान सरकार ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखकर पुरानी पेंशन प्रणाली को बहाल करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा है कि दो प्रकार की पेंशन योजनाएं रखकर कर्मचारियों में भेदभाव करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

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